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बिहार तबादलों पर विवाद गहराया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के 17 आईपीएस अधिकारियों का तबादला करने के राज्यपाल बूटा सिंह के फ़ैसले को लेकर चल रहा विवाद थम नहीं रहा है. इन तबादलों में अपनी अनदेखी किए जाने से नाराज़ बिहार के मुख्य सचिव जीएस कंग को मनाने में बूटा सिंह सफल नहीं हो सके हैं. हालांकि बूटा सिंह प्रोटोकॉल तोड़कर जीएस कंग के घर पर उन्हें मनाने गए थे लेकिन उन्होंने काम पर लौटने से इनकार कर दिया है. इस बीच इस विवाद के चलते विपक्षी गठबंधन एनडीए ने बूटा सिंह को वापस बुलाने की मांग की है. इन विवादों के बीच केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने भी राज्यपाल बूटा सिंह को दिल्ली तलब किया था. विवाद इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब राज्यपाल के कार्यालय से 17 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी हुए. इस आदेश के बाद मुख्य सचिव जीएस कंग ने अवकाश पर जाने का निर्णय लिया. मुख्य सचिव ने कहा है, "मैं व्यवस्था का सवाल उठा रहा हूँ प्रशासन के मामलों में मुझे विश्वास में नहीं लिया गया." उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अवकाश से वापस नहीं लौट रहे हैं. इसके बाद केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि कंग अपने काम पर नहीं लौटते हैं तो केंद्र सरकार नए मुख्य सचिव की नियुक्ति करेगी. उल्लेखनीय है कि 29 जुलाई को आरजेडी के विवादित सांसद शहाबुद्दीन पर कार्रवाई करने वाले पुलिस अधीक्षक सहित 17 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया था. इसमें पटना शहर और ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक भी शामिल थे. |
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