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श्रीनगर में 24 घंटे तक चली मुठभेड़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के बादशाह चौक के आसपास चरमपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच चली मुठभेड़ 24 घंटे बाद शनिवार को समाप्त हुई. पुलिस का कहना है कि उन्हें इस अभियान के बाद अब तक दो चरमपंथियों के शव बरामद हुए हैं. पुलिस महानिदेशक गोपाल शर्मा का कहना था कि यह अभियान इसलिए लंबा चला क्योंकि सुरक्षाबल आम नागरिकों का कोई नुक़सान नहीं चाहते थे. इसके पहले तक सुरक्षाबल उस इमारत में आग लगा देते थे जिसमें चरमपंथी छुपे होते थे. लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया. पुलिस महानिदेशक ने बताया कि हर साल 15 अगस्त के आसपास चरमपंथी गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं. ज़िम्मेदारी बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार इस हमले की ज़िम्मेदारी जमीते-उल-मुजाहिदीन और अल मंसूरियन ने ली है. उनका दावा है कि इसमें उनके चार लोग शामिल हुए थे लेकिन पुलिस का कहना है कि अब तक उन्हें दो चरमपंथियों के शव बरामद हुए हैं. चरमपंथियों के इस हमले में 16 लोग घायल हुए हैं जिनमें सात पत्रकार भी शामिल हैं. चरमपंथियों ने बादशाह चौक में दो इमारतों में मोर्चा जमा लिया था. सुरक्षाबलों ने पूरी इलाक़े के आसपास घेरा डाल दिया था और दोनो ओर से गोलीबारी चली थी. शुक्रवार को चरमपंथियों ने पुलिस के एक वाहन को उड़ा दिया था और सुरक्षाबलों पर एक हथगोला भी फेंका था. पुलिस का कहना है कि चरमपंथियों ने पुलिस के एक वाहन पर गोली चलाई थी जिससे वाहन के ईंधन के टैंक में आग लग गई. ड्राइवर और अन्य पुलिसकर्मियों ने वाहन से कूद कर जान बचाई. |
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