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कश्मीर में हत्या की जाँच के आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर में सेना ने कूपवाड़ा ज़िले के बंगारकुंड गाँव में तीन युवकों की हत्या के मामले की जाँच के आदेश दिए हैं. लेफ़्टिनेंट जनरल एसएस ढिल्लों ने मंगलवार को प्रभावित गाँवों का दौरा करने के बाद यह घोषणा की. श्रीनगर में आयोजित एक प्रेस कॉफ़्रेंस में उन्होंने तीन 'निर्दोष' युवकों की हत्या पर खेद प्रगट किया और कहा कि स्थानीय लोगों का ग़ुस्सा जायज़ है. उन्होंने कहा कि सत्य का पता तो जाँच के बाद ही चलेगा लेकिन ऐसा लगता है कि सेना ने जब गोली चलाई तो उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि युवक निर्दोष हैं. लेफ़्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने मारे गए युवकों के परिजनों को तीन-तीन लाख और घायलों को दो-दो लाख रुपए का मुआवज़ा देने की पेशकश की. हालाँकि एक स्थानीय पत्रकार का कहना था कि प्रभावित परिवार मुआवज़ा नहीं लेंगे लेकिन जनरल ढिल्लों ने वन मंत्री जीएम सोफ़ी के हवाले से बताया कि परिवार धनराशि को बैंक में जमा करवाना चाहते हैं. इधर कुपवाड़ा ज़िले में युवकों की हत्या के विरोध में लगातार तीसरे दिन मंगलवार को भी प्रदर्शन हुए हैं. पुलिस को गुगलूसा गाँव में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस छोड़ी और पुलिस ने हवा में गोलियाँ भी चलाईं. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और एक सरकारी बस और तीन कारों को नुक़सान पहुँचाया. इस घटना में दस लोग घायल हो गए जिनमें चार पुलिस जवान शामिल हैं. घटना पुलिस के अनुसार घटना शनिवार देर रात की है जब भारतीय सेना के जवानों ने बंगारकुंड गाँव में तीन युवकों को 'ग़लती से' चरमपंथी समझकर मार दिया था. ये लोग बंगारकुंड गाँव में एक शादी में भाग लेने गए थे. उस वक़्त ये लोग वहाँ शादी वाले घर के बाहर घूम रहे थे जब गश्त लगा रहे भारतीय सैनिकों ने चरमपंथी समझकर उन पर गोलियाँ चलाईं. दो युवक घटनास्थल पर ही मारे गए थे जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था. मौत की ख़बर सुनते ही कूपवाड़ा ज़िले के लोग सड़कों पर उतर आए थे और एक पुलिस थाने में घुस गए थे. नाराज़ लोगों ने कुछ वाहनों को भी नुक़सान पहुँचाया. भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस ने हवा में गोली चलाई थी. |
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