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आडवाणी के ख़िलाफ़ आरोप तय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश में रायबरेली की एक अदालत ने छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी के ख़िलाफ़ आरोप निर्धारित करते हुए कहा है कि उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जाना चाहिए. भाजपा अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में गुरूवार को रायबरेली की एक अदालत में पेश हुए. आडवाणी के साथ भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के सात अन्य वरिष्ठ भी इस मामले में अभियुक्त हैं जिनमें मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार और विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल और गिरिराज किशोर शामिल हैं. अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी. उस दिन लालकृष्ण आडवाणी ख़ुद अयोध्या में मौजूद थे. उन पर आरोप है कि उन्होंने भाषण देकर हिंदू कट्टरपंथियों को भड़काया और बाबरी मस्जिद पर हमला करने के लिए उकसाया. रायबरेली की अदालत ने कहा है आडवाणी और सात अन्य नेताओं पर दंगा और नफ़रत फैलाने और हिंदू कट्टरपंथियों को बाबरी मस्जिद पर हमला करने के लिए उकसाने के आरोप में मुक़दमा चलाया जाए. सभी अभियुक्तों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए ख़ुद को निर्दोष बताया है. गुरूवार को अदालत ने इन अभियुक्तों को ज़मानत पर छोड़ दिया लेकिन 30 अगस्त को अगली सुनवाई के लिए हाज़िर होने का निर्देश दिया. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 2000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. सीबीआई के वकील पीके चौबे ने बताया कि अदालत ने सभी मुल्ज़िमों को आरोप पढ़कर सुनाए. आरोप सुनने के बाद सभी मुल्ज़िमों ने ख़ुद को निर्दोष बताया. इस पर अदालत ने 30 अगस्त की तारीख़ निर्धारित की है. इस दिन अभियोजन पक्ष यानी सीबीआई को अपने सबूत पेश करने होंगे. इन नेताओं के अदालत में पेश होने के वक़्त आसपास कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए.
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है. विनय कटियार का कहना है, "यह एक झूठा मामला है. किसी ने भी किसी को नहीं भड़काया था. हिंदू कारसेवा करने के लिए आए थे और उन्होंने मस्जिद के स्थान पर एक अस्थाई मंदिर बनाया था." लेकिन बहुत से मुसलमान इसे ख़ारिज करते हैं. बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के ज़फ़रयाब जीलानी का कहना था, "बाबरी मस्जिद विध्वंस एक सुनियोजित घटना थी. वहाँ लोग कुल्हाड़ियों और कुदालों के साथ आए थे, आडवाणी जैसे नेताओं ने उन लोगों से मस्जिद गिराने को कहा था." अगली सुनवाई अदालत के आदेश पर आठों नेताओं ने अपनी हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए निजी मुचलका भरा. सीबीआई के वकील का कहना था कि 30 अगस्त को सभी को पेश होना होगा. 2003 में रायबरेली की अदालत ने आडवाणी को सभी आरोपों से बरी कर दिया था. लेकिन अदालत के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. हाई कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए 6 जुलाई को आडवाणी और अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ मुक़दमा फिर से शुरू करने का आदेश दिया. इस मामले की सुनाई के दौरान रायबरेली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. आडवाणी जब अदालत में पेश हुए तो उनके साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी आए थे. लालकृष्ण आडवाणी के साथ लखनऊ से बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता भी आए थे और वे जयश्री राम के नारे लगा रहे थे. |
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