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संघ ने इस्तीफ़ा नहीं माँगाः भाजपा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लालकृष्ण आडवाणी से पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने को नहीं कहा. भाजपा प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संघ नेताओं की लालकृष्ण आडवाणी के साथ बैठक में एक बार भी आडवाणी के इस्तीफ़े की बात नहीं उठी. और जब भाजपा नेताओं की संघ के पदाधिकारियों से मुलाक़ात हुई थी, उसमें भी आडवाणी के इस्तीफ़े की बात नहीं उठी. सुषमा स्वराज का कहना था कि एक व्यक्ति और एक पद के सिद्धांत पर भी कोई बात नहीं उठी. उनका कहना था कि इस बारे में न तो पार्टी में और न ही संघ परिवार में कोई भ्रम है और न कोई विवाद है. भाजपा प्रवक्ता का कहना था कि यह बैठक पहले से आयोजित थी. इसे विशेष रूप से नहीं बुलाया गया था. इस बैठक में पार्टी के सभी महासचिव मौजूद थे. सुषमा स्वराज ने कहा कि सूरत में संघ की बैठक में जिन मुद्दों को उठाया गया था, उन पर चर्चा हुई. लेकिन पार्टी के वैचारिक स्तर पर कोई परिवर्तन नहीं है. भाजपा की इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ब्रिटेन में दिए उस भाषण की आलोचना की गई जिसमें उन्होंने ब्रिटिश राज की तारीफ़ की थी. सुषमा स्वराज का कहना था,'' जो कांग्रेस स्वतंत्रता संग्राम में आगे थी वह सोनिया गाँधी का गुणगान करते करते महात्मा गाँधी के संघर्ष को भूल गई.'' भाजपा ने ब्रिटेन में बम धमाकों के बाद गुरुद्वारों और मस्जिदों पर हमलों पर भी चिंता जाहिर की और सरकार से माँग की कि वह कूटनीतिक तौर-तरीकों से इस मामले को उठाए. संघ का रुख़ हालांकि माना जा रहा था कि आरएसएस के साथ चल रहे विवादों पर विचार-विमर्श के लिए यह बैठक बुलाई गई थी. सोमवार को आरएसएस के नेताओं ने भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात की थी. संघ ने शनिवार को एक बयान जारी करके कहा था कि संघ मूल रुप से तीन विषयों पर चिंतित है, एक तो वैचारिक भटकाव, दूसरा वाणी का संयम और तीसरा अनुशासनहीनता. भारत के कई अख़बारों ने ख़बरें प्रकाशित की थीं कि संघ आडवाणी को भाजपा अध्यक्ष का पद छोड़ने के लिए कह सकता है. समाचार एजेंसियों के अनुसार संघ के महासचिव मोहन भागवत के नेतृत्व में मदनदास देवी और सुरेश सोनी ने आडवाणी और वाजपेयी से मुलाक़ात की थी उल्लेखनीय है कि भाजपा अध्यक्ष आडवाणी ने अपने पाकिस्तान दौरे के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कह दिया था और इसे लेकर संघ परिवार में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था. इस विवाद के कारण लालकृष्ण आडवाणी को इस्तीफ़ा देना पड़ा था हालांकि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा बाद में वापस ले लिया था. |
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