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आडवाणी के ख़िलाफ़ सम्मन का निर्देश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनकी कथित भूमिका के मामले में अदालत में तलब किया गया है. ग़ौरतलब है कि कुछ हिंदू चरमपंथियों ने बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया था जिसके बाद देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो - सीबीआई से कहा है कि वह आडवाणी और कुछ अन्य नेताओं को अदालत में पेश होने के लिए सम्मन जारी करे. अदालत ने यह आदेश बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की आपराधिक सुनवाई फिर से किए जाने का अनुरोध करने वाली एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिए हैं. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश एमए ख़ान ने सीबीआई से यह भी कहा है कि वह ये सम्मन अख़बारों में भी प्रकाशित कराए ताकि सम्मन उन लोगों तक पहुँचे समझे जाएँ और कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए. सम्मन सीबीआई ने यह याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चार साल पहले दायर की थी लेकिन कुल 21 अभियुक्त नेताओं में से छह को नोटिस नहीं पहुँचे थे. इन नेताओं को एक विशेष अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस में आपराधिक षडयंत्र के आरोप से बरी कर दिया था जिनमें लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल थे.
सीबीआई ने उस विशेष अदालत के फ़ैसले को चुनौती दी थी लेकिन इन नेताओं को नोटिस जारी नहीं होने की वजह से उच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू नहीं हो सकी थी. इस दौरान आडवाणी सत्ता में थे. वकीलों का कहना है कि आडवाणी चाहते थे कि मुक़दमे की सुनवाई में देरी हो. वकीलों का यह भी कहना है कि इस दौरान सीबीआई भी ढीलीढाली ही रही. कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के बाद सीबीआई के रुख़ में कुछ बदलाव नज़र आया है और सीबीआई के वकील पीके चौबे इन नेताओं तक नोटिस पहुँचाने में मदद की पेशकश भी कर चुके हैं. न्यायालय ने पीके चौबे का यह सुझाव भी स्वीकार कर लिया कि नोटिस अख़बारों में भी प्रकाशित कराए जाएँ. सामान्य प्रक्रिया के तहत इस तरह के नोटिस निचली अदालतों के ज़रिए पहुँचाए जाते हैं. आडवाणी और कुछ अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ ये नोटिस ऐसे समय में अख़बारों में प्रकाशित होंगे जब तीन राज्यों में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं. |
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