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चरमपंथियों के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए चरमपंथियों के ख़िलाफ़ एक बड़ा अभियान चलाने का आदेश दिया है. परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस अभियान के तहत ऐसी किताबों, पत्र-पत्रिकाओं, सीडी वग़ैरा को भी ज़ब्त करने के आदेश दिए हैं जिनसे नफ़रत को बढ़ावा मिलने की आशंका है. इस तरह की सामग्री दिसंबर 2005 तक बाज़ारों से हटाने के आदेश दिए गए हैं. इससे पहले परवेज़ मुशर्रफ़ ने लंदन में सात जुलाई को हुए बम धमाकों की जाँच में पूरा समर्थन और सहयोग देने का भरोसा दिलाया था. इस बीच पाकिस्तान के शिक्षा मंत्री ने कहा कि हो सकता है कि देश में कुछ ऐसे मदरसे हों जिनके बारे में सरकार को पूरी जानकारी नहीं हो. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने ग़ैरक़ानूनी इस्लामी गतिविधि के ख़िलाफ़ अभियान की घोषणा करते हुए कहा, "सरकार अतिवादी गतिविधियों को सहन नहीं करेगी और आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई बिना डिगे और पूरी ताक़त के साथ जारी रहेगी." परवेज़ मुशर्रफ़ ने सुरक्षा बलों को आदेश दिया कि वे चरमपंथी गुटों को चंदा इकट्ठा करने और हथियारों का दिखावा करने से रोकें. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने यह बात देश के ज़िला पुलिस अधिकारियों की बैठक में कही. कराची में बीबीसी संवाददाता आमिर अहमद ख़ान का कहना है कि ज़िला पुलिस अधिकारियों की यह बैठक क्यों बुलाई गई थी, इस बारे में कुछ जानकारी नहीं है. लेकिन संवाददाता का कहना है कि हो सकता है कि यह लंदन में हुए धमाकों में हमलवारों का पाकिस्तान के साथ संबंध से उभरे हालात के मद्देनज़र बुलाई गई है और इससे आतंकवाद विरोधी अभियानों में और मज़बूती मिल सकेगी. |
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