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शुक्रवार, 15 जुलाई, 2005 को 08:22 GMT तक के समाचार
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जाँच में पूरा सहयोग करेंगे: मुशर्रफ़
लंदन में श्रद्धांजलि
गुरूवार को दो मिनट का मौन रखा गया
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने लंदन में सात जुलाई को हुए बम धमाकों की जाँच में अपना पूरा समर्थन और सहयोग देने का भरोसा दिलाया है.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने गुरूवार शाम को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से टेलीफ़ोन पर बातचीत के बाद यह भरोसा दिलाया.

टोनी ब्लेयर ने समर्थन और सहयोग की पेशकश के लिए परवेज़ मुशर्रफ़ का शुक्रिया अदा किया.

गुरूवार को पाकिस्तान ने पुष्टि की थी कि ब्रितानी पुलिस ने जिस एक व्यक्ति को हमलावरों में शामिल बताया है उसने कुछ समय पहले पाकिस्तान का दौरा किया था.

कहा जाता है कि शहज़ाद तनवीर ने कुछ समय पहले पाकिस्तान में एक मदरसे में तालीम पाई थी लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि अभी तक इस बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है कि शहज़ाद तनवीर देश में कहाँ-कहाँ गया और किससे-किससे मिला.

इससे पहले ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा था कि वह पाकिस्तान में चलने वाले कुछ मदरसों पर चिंतित हैं.

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता पॉल एंडरसन का कहना है कि पाकिस्तानी ख़ुफ़िया और जाँच सेवाओं के अधिकारी ब्रिटेन की इस माँग पर मुस्तैदी से काम कर रही हैं कि तीन हमलावरों के बारे में कुछ और जानकारी मिल सके.

पाकिस्तान दौरा

कहा जा रहा है कि शहज़ात तनवीर पाकिस्तान में दो बार गया लेकिन बाक़ी दो लोगों का पाकिस्तान जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता.

पुलिस ने यह तस्वीर हसीब हुसैन की बताई है

बीबीसी संवाददाता के अनुसार अगर वे दोनों लोग पाकिस्तान में 2002 के बाद दाख़िल हुए होंगे तो ऐसा उन्होंने चोरी-छुपे किया होगा क्योंकि 2002 में पाकिस्तान में ऐसी तकनीकी प्रणाली लगा दी गई है जिसमें पाकिस्तान में क़ानूनी रूप से दाख़िल होने वाले हर व्यक्ति की तस्वीर आ जाती है.

पाकिस्तान ने 11 सितंबर 2001 के न्यूयॉर्क हमलों के बाद 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध' में अमरीका का बढ़चढ़कर साथ दिया है.

पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्री आफ़ताब अहमद ख़ान शेरपाओ ने बुधवार को कहा था कि उनके देश ने ब्रिटेन को ऐसी पुख़्ता ख़ुफ़िया सूचनाएँ मुहैया कराई थीं जिनके आधार पर मई 2005 में आम चुनावों के समय हमलों को रोकने में मदद मिली.

अल क़ायदा के कई सदस्यों को पाकिस्तान में गिरफ़्तार किया गया है. मई 2005 में ही पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने लीबियाई मूल के अबू फ़राज़ अल लिब्बी को गिरफ़्तार किया था जिन्हें अल क़ायदा संगठन का तीसरे नंबर का नेता बताया गया था.

अल क़ायदा से संबंधों के आरोप में एक कंप्यूटर विशेषज्ञ मोहम्मद नईम नूर ख़ान को जुलाई 2004 में गिरफ़्तार किया गया था और उनके बारे में कहा गया था कि उनसे मिली जानकारी के बाद पाकिस्तान और ब्रिटेन में कई गिरफ़्तारियाँ की गई थीं.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा था कि नईम नूर ख़ान अल क़ायदा का महत्वपूर्ण सदस्य रहा है.

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