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वनराज की बढ़ती संख्या से चिंता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश में वन्य जीव विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि वे ढाका चिड़ियाघर में चीतों और शेरों की बढ़ती संख्या पर क़ाबू पाने के उद्देश्य से उनकी जन्म दर रोकने के तरीक़े अपनाने जा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि ढाका चिड़ियाघर में इस समय कुल 36 शेर और चीते हैं जबकि उसमें जगह सिर्फ़ 16 के लिए है. चिड़ियाघर में जानवरों को भोजन के लिए जो बजट मिलता है उसमें से आधा सिर्फ़ वनराज के खाने पर ही ख़र्च हो रहा है. अभी इस बारे में फ़ैसला किया जाना है कि शेरों और चीतों की जन्म दर रोकने के लिए गोलियाँ दी जाएँ या फिर उनमें इंजेक्शन के लिए हार्मोन दिए जाएँ. अधिकारियों ने कहा है कि इस बारे में दो महीने के अंदर कोई ठोस फ़ैसला ले लिया जाएगा. बढ़ती संख्या चिड़ियाघर की देखभाल करने वाले मफ़ीज़ुर रहमान ने बीबीसी को बताया वहाँ चीतों और शेरों की संख्या वृद्धि को रोकने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार किया जा रहा है जिसमें उनकी जन्म दर पर नियंत्रण का विकल्प भी शामिल है. रहमान ने कहा कि बांग्लादेश में पर्याप्त जंगल नहीं हैं जहाँ इन चीतों और शेरों को भेजा जा सके. हालाँकि बांग्लादेश में और विदेशों में कुछ चिड़ियाघरों से अतिरिक्त चीतों और शेरों को लेने की गुज़ारिश की जा चुकी है लेकिन कोई आगे नहीं आया है. रहमान का कहना था, "हमारा प्रारंभिक फ़ैसला जन्म रोकने के लिए गोलियाँ या फिर हार्मोन के इंजेक्शन देने का है लेकिन यह जानने की कोशिश भी की जा रही है कि अन्य देशों में चिड़ियाघरों में इस तरह की समस्या से कैसे निपटा जाता है." जानकारों का कहना है लंदन के चिड़ियाघर में भी चीतों और शेरों की बढ़ती संख्या पर क़ाबू पाने के लिए जन्म दर नियंत्रित करने के उपाय अपनाए जाते हैं. हालाँकि रहमान कहते हैं कि वह इन चीतों और शेरों की जन्म दर कम करने के लिए कोई स्थायी तरीक़ा नहीं अपनाना चाहते हैं. उनका कहना था, "गोलियाँ और हार्मोन के इंजेक्शनों से चीतों और शेरों की यौन इच्छाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. जन्म नियंत्रण तरीक़ा बंद करने के बाद वे फिर से प्रजनन प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे." |
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