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बाघों की रक्षा के लिए कार्यबल गठित | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सरकार ने बाघों की रक्षा के लिए एक कार्यबल गठन करने का फ़ैसला किया है. इसके अलावा शिकार क़ानूनों को और कड़ा करने पर भी सहमति हुई है. साथ ही सरिस्का अभियारण्य में बाघों के लापता होने के मामले की जाँच अब सीबीआई करेगी. यह जानकारी सीबीआई निदेशक यूएस मिश्रा ने प्रधानमंत्री से इस संबंध में मुलाक़ात के बाद दी. सीबीआई निदेशक का कहना था कि इस कार्यबल में वन विभाग, सीबीआई और अन्य एजेंसियों के लोग शामिल होंगे. सीबीआई निदेशक के साथ वन विभाग के अधिकारी भी प्रधानमंत्री से मिले. ऐसे मामलों के क़ानूनी पहलुओं पर भी चर्चा हुई और यह तय हुआ कि क़ानून की समीक्षा की जाएगी ताकि शिकार के मामलों में आसानी से जमानत न मिल सके. सीबीआई निदेशक का कहना था कि ऐसे सबूत हैं कि पिछले दो वर्षों में सरिस्का में लगभग 10 बाघों का शिकार किया गया. उनका कहना था कि राजस्थान सरकार ने ही चार बाघों के शिकार का मामला सीबीआई को सौंपा है. इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निर्देश दिए थे कि बाघों को अवैध शिकारियों से बचाने के लिए कड़े क़दम उठाए जाएँ. साथ ही बाघों को बचाने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति बनाने को कहा था. इसी सिलसिले में उन्होंने राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क का दौरा भी किया था. राजस्थान के अभयारण्यों से बाघों के बड़ी तादाद में लापता होने की चर्चा तेज़ होने के बाद प्रधानमंत्री वहाँ पहुँचे थे. भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एक लिखित बयान में बताया है कि पिछले पाँच वर्षों में 400 से अधिक बाघ लापता हो चुके हैं. बाघों की रक्षा के लिए भारत सरकार ने एक कार्यदल का गठन किया है और पर्यावरणविद् सुनीता नारायण को उसका प्रमुख बनाया गया है. प्रधानमंत्री ने वन अधिकारियों से विस्तार से बातचीत की और बाघों के संरक्षण को एक महत्वपूर्ण काम बताया. भारत में इस समय बाघों की कुल संख्या लगभग साढ़े तीन हज़ार आँकी गई है लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि वास्तविक संख्या कहीं कम है. |
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