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आठ वर और एक वधू चाहिए... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भोपाल की आठ वधुओं के लिए वरों की ज़रुरत है. और एक वर भी है जिसके लिए वधू की तलाश है. और इसके लिए भोपाल के कई सरकारी अफ़सर परेशान हैं. कई अफ़सर तो इस तलाश में दिल्ली, मुंबई एक किए हुए हैं. वधुओं में एक 14 वर्षीय बाघिन है और सात मादा मगरमच्छ. और वर है एक लकड़बग्घा. चूंकि शहर या प्रदेश में उनके लायक जोड़े मौजूद नहीं इसीलिए वन विहार प्रबंधन इनके जोड़ीदारों की तलाश दूसरे शहरों में कर रहा है. प्रबंधन ने इस बाबत दिल्ली और मुंबई के बोरीवली स्थित चिड़ियाघरों को अपनी पेशकश भेजी है. इसी तरह के संदेश नंदनकानन और दूसरे वन विहारों को भी भेजे गए हैं. मादा मगरमच्छों के लिए वरों और व्यस्क नर लकड़बग्घे “अकेला” के लिए एक संगिनी के लिए न्यौता भी इस महीने के शुरू में कई जगहों पर भेजा गया है. जीन का मामला बाघिन के साथी के एवज़ में तो प्रबंधन चीते, भालू और बाघ तक देने को तैयार है. भोपाल वन विहार में यूँ तो नर, मादा मिलाकर चौदह बाघ हैं लेकिन इनमें सफेद बाघ एक ही है, मादा रीनी. वन विहार के प्रबंधक एलके चौधरी का कहना है कि यूँ तो रीनी पहले भी दो बच्चों पलाश और श्वेता को जन्म दे चुकी है, लेकिन दोनों समान्य रंग रुप के हैं सफेद रंग के नहीं. और वन विहार चाहता है कि सफेद बाघ की संख्या प्रजनन द्वारा बढ़ाई जाए. उन्होंने कहा "यूँ तो सामान्य जंगल में रहने वाले बाघों की उम्र 20 साल होती है और रीनी इसमें से 14 वर्ष काट चुकी है, लेकिन फिर भी अभी उनके प्रजनन की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो बच्चे सफेद रंग के भी हो सकते हैं क्योंकि रीनी में वह जीन मौजूद है." "इसकी उम्मीद ज़्यादा इसलिए भी है क्योंकि बाहर से आने वाला सफेद बाघ भारत में पाए जाने वाले सामान्यतः नारंगी रंग के धारीदार रॉयल बंगाल टाईगर की कोई अलग प्रजाति नहीं होती, बल्कि जीन की किसी प्रक्रिया के कारण इनका रंग कभी-कभी सफेद हो जाता है." वन विहार का अमला सोच रहा है कि अगर किसी कारणवश सफेद बाघनी का प्रजनन संभव नहीं होता है तो बाहर से आने वाले नर का मेल उसकी बच्ची श्वेता से भी करवा सकते हैं जिसके भीतर भी सफेद बाघ के जीन मौजूद हैं. भोपाल के बड़ा तालाब के पास स्थित करीब 400 हेक्टर लंबे चौड़े वन विहार में आजकल पर्यटकों से ज़्यादा जिस व्यक्ति का सबसे ज़्यादा इंतजार किया जाता है वह है डाकिया. शायद कोई मधुर संदेश आ जाए. |
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