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उल्फ़ा ने शांति प्रस्ताव पर जवाब भेजा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम के उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम (उल्फ़ा) ने केंद्र सरकार के शांति प्रस्ताव पर औपचारिक रूप से जवाब दिया है. उल्फ़ा के चेयरमैन अरबिंद राजखोवा का लिखा एक पत्र शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंप दिया गया. उल्फ़ा और केंद्र सरकार के बीच मध्यस्थता कर रहीं वरिष्ठ असमी लेखिका इंदिरा गोस्वामी ने यह पत्र सौंपा. बीबीसी से बातचीत में इंदिरा गोस्वामी ने कहा कि पत्र राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन के नाम था. उन्होंने कहा, "यह एक सकारात्मक क़दम है. जल्द ही उल्फ़ा प्रधानमंत्री के नाम एक अन्य पत्र भेजने जा रहा है." मुद्दा केंद्र सरकार ने उल्फ़ा को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. गोस्वामी ने बताया, "मेरा मानना है कि उल्फ़ा बातचीत के एजेंडे में असम की संप्रभुता का मुद्दा शामिल कराना चाहता है." उल्फ़ा असम की संप्रभुता के मुद्दे पर बातचीत से इनकार करता रहा है. जानकारों का कहना है कि यह असंभव ही लगता है कि सरकार इस मुद्दे को बातचीत में शामिल करने को तैयार हो. हालाँकि सरकार पहले यह स्पष्ट कर चुकी है कि अगर उल्फ़ा चाहे तो बातचीत के दौरान इस मुद्दे उठा सकता है. मध्यस्थता की भूमिका निभा रहीं लेखिका इंदिरा गोस्वामी ने बताया कि उल्फ़ा ने उनसे यह भी कहा है कि वे असम और बांग्लादेश की जेलों में बंद उसके नेताओं की रिहाई का मुद्दा उठाएँ. उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री कार्यालय से ढाका जेल में बंद उल्फ़ा नेता अनूप चेतिया की रिहाई का मामला उठाएँगी. उल्फ़ा का कहना है कि सरकार के बातचीत के प्रस्ताव पर वह इन नेताओं से भी बातचीत करना चाहता है. असम के ज़्यादातर उग्रवादी संगठनों ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत शुरू कर दी है जिनमें नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (एनडीएफ़बी) भी शामिल है. |
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