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सिन्हा को प्रवक्ता पद से हटाया गया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पहले लालकृष्ण आडवाणी और फिर झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी के बाद यशवंत सिन्हा को भाजपा ने प्रवक्ता के पद से हटा दिया है. भाजपा महासचिव और प्रवक्ता अरूण जेटली ने इसकी घोषणा की और कहा कि पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने प्रवक्ता पैनल का पुनर्गठन किया है. हालांकि पार्टी ने इसे अनुशासन की कार्रवाई करने से बचते हुए इसकी कोई वजह नहीं बताई है. एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता जेटली ने कहा, "किस को कौन सा काम दिया जाना है यह पार्टी अध्यक्ष का विशेषाधिकार है और इसके लिए कोई कारण बताना भी ज़रुरी नहीं है." जेटली ने बताया कि इस पुनर्गठन के अनुसार वे स्वयं और सुषमा स्वराज पार्टी के मुख्य प्रवक्ता होंगे जबकि प्रकाश जावड़ेकर और मानवेंद्र सिंह अतिरिक्त प्रवक्ता के रुप में कार्य करेंगे. दो दिन पहले ही पार्टी की ओर से यशवंत सिन्हा को सलाह दी गई थी कि वे पार्टी से जुड़े मसलों पर सार्वजनिक रुप से बयान न दें. उल्लेखनीय है कि जब मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताने वाले आडवाणी के बयान पर जब विवाद चल रहा था तब आडवाणी के बयान का खुला विरोध करने वाले गिने चुने नेताओं में से थे. इसके अलावा उन्होंने कहा था कि इस विवाद के बाद ये देखना चाहिए कि क्या आडवाणी नेता प्रतिपक्ष की भूमिका ठीक तरह से निभा सकेंगे. इसके बाद उन्होंने झारखंड में भाजपा की सरकार और मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के ख़िलाफ़ बयान दिया था. |
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