|
हिंदुत्ववादी भाजपा छोड़ें : विहिप | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व हिंदू परिषद(विहिप) ने भारतीय जनता पार्टी के हिंदुत्व समर्थकों से पार्टी छोड़कर बाहर आने का आह्वान किया है. आचार्य गिरिराज किशोर ने बीबीसी हिंदी सेवा से विशेष बातचीत में किसी नई हिंदुत्ववादी पार्टी के गठन के बारे में कहा, "अभी नहीं कह सकता. ये तो संतों के रुख़ पर है. संतों को कौन नियंत्रित कर सकता है. कोई नहीं." भाजपा के विभाजन की संभावनाओं की ओर इशारा करते हुए आचार्य गिरिराज किशोर ने कहा, "मुझे लगता है उसी में से लोगों को निकाला जा सकता है. अच्छे लोग इधर आएँगे, जो सेक्युलर हैं उधर जाएँगे." उन्होंने माना कि विहिप भाजपा में विभाजन की कोशिश नहीं कर रही है, लेकिन कहा कि यह बात साफ होनी चाहिए कि पार्टी के भीतर कौन हिंदुत्व समर्थक है और कौन हिंदुत्व विरोधी. उन्होंने कहा, "मालूम पड़ना चाहिए कि कौन मित्र है, कौन है शत्रु." आचार्य गिरिराज किशोर और विहिप के अन्य नेता हरिद्वार में संगठन के मार्गदर्शक मंडल की बैठक के लिए जमा हुए हैं. सेक्युलर भाजपा आचार्य गिरिराज किशोर ने कहा कि भारतीय राजनीति में कोई हिंदूवादी पार्टी नहीं रह गई है. उन्होंने कहा, "मुझे तो(भाजपा) हिंदू पार्टी नहीं लगती है. वो तो सेक्युलर है." उन्होंने कहा कि विहिप का संबंध भाजपा के भीतर के उन लोगों मात्र से है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा वाले हैं. आचार्य गिरिराज ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से विहिप ने पिछले दो वर्षों से संबंध तोड़ रखा है. मोहम्मद अली जिन्ना को कथित रूप से धर्मनिरपेक्ष बताने के लिए विहिप भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी से अब तक खफ़ा है. आचार्य गिरिराज किशोर ने कहा, "जिन्ना वाली बात को संघ ने स्वीकार नहीं किया है. (आडवाणी ने)त्यागपत्र देने के बाद त्यागपत्र वापस ले लिया इसे भी संघ ने अच्छा नहीं माना है." |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||