BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
रविवार, 26 जून, 2005 को 02:37 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
सूनामी मुआवज़े को लेकर निराशा

 शिविर
लोग अब भी अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं
सूनामी से बुरी तरह प्रभावित अंडमान निकोबार में छह महीने बाद भी लोग अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लोगों में राहत और पुनर्वास को लेकर काफ़ी शिकायतें हैं.

इंटरमीडिएट शेल्टर कहे जाने वाले अस्थायी घरों में लगभग दस हज़ार परिवार रह रहे हैं, लकड़ी और टीन के शिविरों को बनाने का काम पूरा हो चुका है.

अब सवाल यही है कि आख़िर लोग कितने दिनों तक शिविरों में रहेंगे और उनके अपने मकान कब और कैसे बनेंगे, राहत शिविर आख़िर कब तक चलते रहेंगे?

दूसरी बड़ी समस्या रोज़गार की है, ज़्यादातर लोगों की रोज़ी-रोटी, दुकान-कारोबार सब कुछ छीन गए हैं और अब भी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाए हैं.

लोगों को ज़्यादातर काम ग़ैर सरकारी संगठनों की ओर से मिल रहा है, लोग सड़क बनाने और टूटी हुए सरकारी इमारतों को ठीक करने की मज़दूरी कर रहे हैं.

शिकायतें

लोगों को सबसे अधिक शिकायतें मुआवज़े को लेकर है, लोगों का कहना है कि सरकार ने मुआवज़ा बाँटने में जनता के नुक़सान का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा.

अंडमान निकोबार में मुआवज़े के रूप में एक आदिवासी महिला को दो रूपए दिए जाने की ख़बर के सुर्खियों में आने के बाद यहाँ मुआवज़े के आवंटन की स्थिति की ओर दुनिया का ध्यान गया था.

मैं जिन लोगों से मिला, सबने यही शिकायत की कि मुआवज़ा या तो नहीं मिला है या फिर बहुत कम मिला है.

कई लोगों ने बताया कि उन्हें 20-30 रूपए से लेकर 200-300 रूपए तक मुआवज़ा मिला है जिससे वे कुछ भी नहीं कर सकते.

अंडमान निकोबार के लोगों का कहना है कि असली समस्या रोज़गार की है, मछली मारने वाले और दूसरे छोटे कारोबार करने वाले सबसे ज़्यादा परेशान हैं.

यहाँ ज़्यादातर लोग मछली मारने और छोटे-मोटे रोज़गार करने वाले हैं, मछेरों का कहना है कि उनकी नावें या तो बह गई हैं या टूट गई हैं, सरकार से जितना मुआवज़ा मिला है उसमें नाव ख़रीदना असंभव है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>