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'कान' वाली बुलेट ट्रेन का परीक्षण | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान की बुलेट ट्रेनें अपनी गति और शानदार डिज़ाइन के लिए दुनिया भर में पहले ही मशहूर हैं. जापानी इंजीनियर रेलगाड़ी की होड़ में आगे बने रहना चाहते हैं इसलिए अब एक नए अत्याधुनिक मॉडल का परीक्षण चल रहा है. इस ट्रेन की ख़ास बात ये भी है कि इसमें इंजन के ऊपर दो इमरजेंसी एयर ब्रेक लगाए गए हैं जो कान की शक्ल के हैं. नई बुलेट ट्रेन औसतन 360 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलेगी, इंजीनियरों का कहना है कि उसकी अधिकतम गति 405 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है. इंजीनियरों का कहना है कि कान की शक्ल वाली इस ब्रेक का इस्तेमाल भूंकप की स्थिति में किया जाएगा. जापान में बुलेट ट्रेन की शुरूआत 1964 में हुई थी, जिसे जापानी भाषा में शिनकासेन कहा जाता है. बुलेट ट्रेन के जिस मॉडल का परीक्षण चल रहा है उसका व्यावसायिक इस्तेमाल वर्ष 2011 तक शुरू हो जाएगा. सुरक्षा शिनकासेन ट्रेनों की सुरक्षा और वक़्त की पाबंदी का रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है और जापानियों को अपनी इस ट्रेन पर बहुत गर्व है. फास्टेक 360एस नाम के इस मॉडल को बनाने वाली कंपनी का कहना है कि सिर्फ़ सबसे तेज़ चलने वाली रेल बनाना उनका लक्ष्य नहीं है, बल्कि वे सबसे सुरक्षित और सुविधाजनक ट्रेन बनाना चाहते थे. जापान की सबसे बड़ी रेल कंपनी ईस्ट जापान रेलवे के प्रवक्ता ने कहा, "परीक्षण का उद्देश्य यह देखना है कि ट्रेन सुरक्षित है या नहीं, तेज़ गति हमारा एकमात्र मक़सद नहीं है." परीक्षण जापान के सेनदाई और कामिकिता शहरों के बीच शनिवार को होगा. दुनिया की सबसे तेज़ गति से चलने वाली ट्रेन हिरोशिमा से कोकुरा के बीच चलती है, उसे टक्कर देती है कि फ्रांस की टीजीवी लाइन की ट्रेनें जो पेरिस को कई प्रमुख यूरोपीय शहरों से जोड़ती हैं. |
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