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ऑक्सफैम को देना होगा आयात शुल्क | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में सूनामी के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए ब्रिटेन की स्वयंसेवी संस्था ऑक्सफैम को श्रीलंका सरकार को आयात शुल्क के रुप में दस लाख डॉलर देने होंगे. इस मामले पर कागज़ी कार्रवाई पूरी न हो पाने के कारण राजधानी कोलंबो में 25 बड़े वाहनों का कोई इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. श्रीलंका की सरकार ने बीबीसी को बताया कि अप्रैल के अंत तक राहत सहायता पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया था लेकिन अब स्थानीय बाज़ार का ध्यान रखना होगा. श्रीलंका में सूनामी के कारण 31000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और पांच लाख से अधिक लोग बेघर हो गए थे. ऑक्सफैम को राहत कार्यों के लिए वाहनों की ज़रुरत है और सरकार इन वाहनों पर आयात शुल्क लगा रही है. ख़राब सड़कें आक्सफैम ने बीबीसी को बताया कि संगठन ने भारत से 25 महिन्द्रा के वाहन मंगवाए जो कि श्रीलंका की ख़राब सड़कों पर चल सकते हैं. संगठन की प्रवक्ता का कहना था " यह बात बिल्कुल साफ़ है कि ऑक्सफैम तो यह शुल्क देना अच्छा नहीं लग रहा है और हम कोशिश कर रहे हैं कि इसे माफ़ करवाया जाए. " फिलहाल सरकार ने यह शुल्क माफ़ नहीं किया है और श्रीलंका के क़ानूनों के मुताबिक ऑक्सफ़ैम को आयात शुल्क देना पड़ सकता है. हालांकि प्रवक्ता ने कहा कि इस घटना से श्रीलंका में ऑक्सफ़ैम के काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ब्रिटेन के अख़बार डेली टेलीग्राफ़ का कहना है कि श्रीलंका के कस्टम विभाग ने वाहनों की क़ागज़ी कार्रवाई पूरा करने के दौरान प्रतिदिन पांच हज़ार डॉलर का शुल्क लगाया है.
सरकार का पक्ष श्रीलंकाई राष्ट्रपति के प्रवक्ता हारिम पियरिस ने बीबीसी से कहा कि वह ऑक्सफ़ैम के एक मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते लेकिन इतना कह सकते हैं कि सूनामी के बाद चार महीने तक आयात शुल्क नहीं लगाया गया है. सरकार के सूनामी राहत कार्यों से जुड़े रहे पियरिस ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने सूनामी के चार महीने बाद आयात शुल्क फिर से लगाने का फैसला किया है ताकि स्थानीय बाज़ार को दिक्कतों का सामना करना न पड़े. उधर ऑक्सफैम का कहना है कि उन्होंने भारत से सिर्फ़ इसलिए वाहन खरीदे क्योंकि श्रीलंका में वाहन नहीं बनाए जाते जिन्हें वो खरीद सके. |
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