|
'सात दिनों में सभी तक सहायता पहुँच सकेगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख जिम मोरिस ने उम्मीद जताई है कि सूनामी से प्रभावित सभी लोगों तक अगले सात दिनों में खाद् पदार्थ ज़रुर पहुँच जाएँगे. इंडोनेशिया के दौरे पर गए मोरिस ने बीबीसी से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कोई भी सूनामी प्रभावित व्यक्ति भूख से नहीं मरेगा. संयुक्त राष्ट्र खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख ने कहा कि आचे प्रांत में एक लाख 30 हज़ार लोगों की मदद की जा रही है. इसी प्रांत में दो सप्ताह पहले भीषण भूकंप और सूनामी लहरें आई थीं. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ दिनों में यह संख्या और बढ़ सकेगी और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सहायता पहुँच सकेगी. खाद्य कार्यक्रम के तहत श्रीलंका में साढे सात लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. अन्नान श्रीलंका में उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान श्रीलंका के दौरे पर हैं जहां राहत कार्यों को लेकर तमिल अलगाववादी संगठन लिट्टे और सरकार के बीच मतभेद उभर आए हैं. दिसंबर में सूनामी लहरों की विनाशलीला में श्रीलंका में 30 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए. अन्नान के साथ विश्व बैंक के प्रमुख जेम्स वूलफ़ेन्सन भी प्रभावित इलाक़ों का दौरा करेंगे. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान श्रीलंका में सरकारी अधिकारियों से मिलेंगे. एलटीटीई के अनुसार अन्नान उनके नेता से भी मिलेंगे. एलटीटीई का आरोप है कि श्रीलंका सरकार ने उन इलाक़ों में बहुत कम सहायता सामग्री भेजी है जहाँ उनका नियंत्रण है. लेकिन सरकार ने इससे इनकार किया है. चेतावनी एलटीटीई ने चेतावनी दी है कि राहत शिविरों से अगर सरकारी सैनिकों को वापस नहीं बुलाया जाता, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं.
शुक्रवार को ही अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने श्रीलंका का दौरा किया था. पॉवेल ने दोनों पक्षों से अपील की थी कि वे मिल कर काम करें. पॉवेल ने गॉल शहर का भी दौरा किया जहाँ राहत कार्यों के लिए अमरीकी मरीन सैनिक टिकेंगे. पॉवेल ने कहा कि वे इंडोनेशिया, थाईलैंड और श्रीलंका की अपनी यात्रा के बारे में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को अवगत कराएँगे. दूसरी ओर एक अन्य प्रभावित देश इंडोनेशिया में भी सरकारी सैनिकों और विद्रोहियों ने एक दूसरे पर हमले करने के आरोप लगाए हैं. इंडोनेशियाई अधिकारियों का कहना है कि आचे प्रांत में विद्रोही सूनामी से पैदा हुई स्थिति का फ़ायदा उठाकर सरकारी सैनिकों पर हमले कर रहे हैं. फ्री आचे मूवमेंट ने भी सरकार पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं कि वह सूनामी का फ़ायदा उठाकर विद्रोहियों को कुचलना चाहती है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||