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रेडियो कंपनी बंद करने का आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में अधिकारियों ने उस रेडियो कंपनी को बंद करने के आदेश दिए हैं जो देश भर में एफ़एम रेडियो स्टेशन चलाती है. कम्यूनिकेशन कॉर्नर नाम की इस रेडियो कंपनी को बंद करने के इस आदेश को मीडिया पर नरेश के और ज़्यादा नियंत्रण स्थापित करने का एक क़दम माना जा रहा है. कंपनी को बंद करने के आदेश सूचना मंत्रालय की तरफ़ से भेज दिया गया है. इस आदेश में कहा गया है कि इस तरह की शिकायतें मिली हैं कि वह कंपनी ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से काम कर रही है लेकिन कोई विवरण नहीं दिया गया है. नेपाल नरेश ने फ़रवरी में सत्ता अपने हाथों में लेने और आपातकाल लागू करने के बाद रेडियो स्टेशनों पर पाबंदी लगा दी थी कि वे समाचार प्रसारित नहीं कर सकते. यह पाबंदी आपातकाल हटाने के बाद भी जारी रही. अलबत्ता कन्यूनिकेशन कॉर्नर ने समाचारों के अलावा स्वास्थ्य, विकास और धर्म जैसे विषयों पर कार्यक्रम बनाने शुरू कर दिए थे. और ये कार्यक्रम देशभर में 14 रेडियो स्टेशनों से प्रसारित किए जा रहे थे. कम्यूनिकेशन कॉर्नर के प्रबंध निदेशक गोपाल गुरागायन ने कहा है कि वह कुछ भी ग़ैरक़ानूनी नहीं कर रहे थे और वह इस मामले में क़ानूनी सलाह ले रहे हैं. इससे पहले नरेश ज्ञानेंद्र ने चार महीने पहले सत्ता हाथ में लेने के अपने फ़ैसले को सही ठहराते हुए विपक्षी दलों से 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' में मदद करने की अपील की थी. |
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