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बुधवार, 25 मई, 2005 को 07:21 GMT तक के समाचार
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सुनील दत्त का निधन
सुनील दत्त
सुनील दत्त फ़िल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं
केंद्रीय खेल और युवा मामलों के मंत्री और मशहूर फ़िल्म अभिनेता सुनील दत्त का दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में निधन हो गया है. वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थे.

सुनील दत्त मुंबई से पाँच बार कांग्रेस के सांसद के रूप में चुने गए.

उनका जन्म 6 जून, 1929 को झेलम ज़िले के ख़ुर्द गाँव में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है. विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया.

अपने प्रशंसकों में सुनील दत्त, 'दत्त साहब' के नाम से जाने जाते थे.

प्रख्तात अभिनेत्री नरगिस से विवाह करनेवाले सुनील दत्त अपने पीछे बेटे संजय दत्त के अलावा दो बेटियों को छोड़ गए हैं.

फ़िल्में और राजनीति

उन्होंने 100 से अधिक फ़िल्मों में काम किया. मुन्नाभाई एमबीबीएस उनकी अंतिम फ़िल्म थी जिसमें वे अपने बेटे संजय दत्त के साथ नज़र आए थे.

अभिनय में अमिट छाप छोड़नेवाले सुनील दत्त ने आम जनजीवन में अपनी ईमानदारी और सामाजिक कार्यों में अपने योगदान से अलग जगह बनाई थी.

उन्होंने पंजाब में शांति के लिए मुंबई से अमृतसर तक की पैदल यात्रा की. हाल में दांडी मार्च की 75 वीं जयंती पर आयोजित मार्च में उन्होंने हिस्सा लिया.

उन्होंने अपना पहला चुनाव 1984 में जीता था और इस चुनाव में उन्होंने राम जेठमलानी को हराया था.

वो 1989,1991,1999 और 2005 में भी जीते लेकिन उन्होंने 1996 और 1998 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था.

पिछले चुनावों में उन्होंने शिव सेना नेता संजय निरुपम को हराया था. लेकिन ऐसी ख़बरें थीं कि संजय निरुपम को कांग्रेस में शामिल करने से वो खुश नहीं थे.

यादगार फ़िल्में

सुनील दत्त 50 और 60 के दशक के सुपर हिट हीरो थे.

सुनील दत्त और संजय दत्त
सुनील दत्त ने मुन्नाभाई एमबीबीएस में अपने बेटे संजय दत्त के साथ काम किया था

उनकी यादगार फ़िल्मों में साधना, सुजाता, मैं चुप रहूँगी, ये रास्ते हैं प्यार के, मुझे जीने दो, गुमराह, पड़ोसन, वक्त, हमराज़, रेशमा और शेरा और मदर इंडिया शामिल है.

मदर इंडिया विदेशी फ़िल्मों की श्रेणी में ऑस्कर के लिए नामांकित हुई थी.

1967 में उनकी तीन फ़िल्में मेहरबान, मिलन, हमराज़ सुपर हिट हुईं थीं.

विधु विनोद चोपड़ा के विशेष अनुरोध पर उन्होंने मुन्ना भाई एमबीबीएस में अपने बेटे संजय दत्त के साथ काम किया था.

हसरत

कुछ समय पहले उन्होंने बीबीसी हिंदी सेवा से विशेष बातचीत में कहा था कि खेल और युवा मामलों का मंत्री बनना उनकी हसरत थी.

सुनील दत्त
सुनील दत्त ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि खेल और युवा मामलों का मंत्री बनना उनकी हसरत थी

उनका कहना था, "मैं तो चाहता था कि यह विभाग मुझे मिले. हमारे देश के 45 फ़ीसदी लोग युवा हैं."

उन्होंने कहा, "लोग मुझसे खेल मंत्रालय के बारे में पूछते हैं, युवा मामलों के बारे में नहीं. युवाओं को सही दिशा मिलेगी, उनके दिल मे देश के लिए कुछ करने का इरादा होगा तो उनमें से अच्छे खिलाड़ी ज़रूर बनेंगे."

भारत में क्रिकेट के प्रभुत्व के बारे में उन्होंने कहा था, "बीस साल पहले अख़बारों में क्रिकेट का भी कोई ख़ास ज़िक्र नहीं रहता था."

भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों के बारे में सुनील दत्त ने कहा था कि दोनों टीमों के बीच जितना आदान-प्रदान हो उतना बढ़िया होगा.

66संघर्ष से भरा जीवन
सुनील दत्त की जीवनी लिख चुकी भावना सोमैया की श्रद्धांजलि.
66एक बहुआयामी व्यक्तित्व
सुनील दत्त अभिनेता के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और समर्पित राजनेता थे.
66दत्त साहब के साथ यात्रा
बीबीसी की टीम को एक बार सुनील दत्त के साथ यात्रा करने का अवसर मिला.
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