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पाकिस्तानी पुलिस की कार्रवाई की निंदा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने लाहौर में एक दौड़ के दौरान अपने वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और अन्य भाग लेनेवालों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. पुलिस ने शनिवार को लाहौर में एक ऐसी दौड़ को रोकने के लिए कार्रवाई की जिसमें पुरूष प्रतिभागियों के साथ महिलाएँ भी हिस्सा ले रही थीं. पुलिस ने दौड़ में शामिल होनेवाले कई लोगों को पहले पीटा और फिर लगभग 30 लोगों को हिरासत में भी ले लिया. जिन लोगों को पकड़ा गया उनमें पाकिस्तान की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष आसमां जहांगीर भी हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार पुलिसवालों ने आसमां जहांगीर के साथ बदसलूकी भी की और कपड़े फाड़ने के बाद पुलिस की वैन में डाल दिया. पुलिस का कहना है कि आसमां जहांगीर के संगठन ने पुरूषों और औरतों के एक साथ दौड़ में भाग लेने पर लगी पाबंदी को तोड़ा है. उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में पिछले महीने ऐसी एक दौड़ पर इस्लामी कार्यकर्ताओँ ने हमला कर दिया था जिसके बाद अधिकारियों ने महिलाओं के ऐसी दौड़ में भाग लेने पर पाबंदी लगा थी. शनिवार की घटना पर आसमां जहांगीर ने कहा,"वे लोगों की आवाज़ दबाना चाहते हैं. ये एक सैनिक सरकार है, तानाशाह सरकार है". उन्होंने कहा कि इस घटना ने सरकार के इस दावे की भी कलई खोल दी है कि वह उदारता और सहनशीलता की नीति अपना रही है. आसमां जहांगीर और अन्य कार्यकर्ताओं को कई घंटे हिरासत में रखने के बाद छोड़ दिया गया. |
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