| 'ओसामा बिन लादेन, मुल्ला उमर ज़िंदा हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान मामलों के जानकार, वरिष्ठ पत्रकार रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई का कहना है कि वे मानते हैं कि ओसामा और तालेबान नेता मुल्ला उमर ज़िंदा हैं और अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान के क्षेत्र में ही हैं. रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई उन गिने-चुने पत्रकारों में से एक हैं जो अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन से कुछ वर्ष पहले मिल भी चुके हैं. बीबीसी हिंदी के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई ने कहा, "ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि ओसामा मारे गए हैं." उनका कहना था कि मुल्ला उमर के वीडियों और ऑडियो कैसेट व चिट्ठियाँ तो समय-समय पर सार्वजनिक होते रहते हैं और ओसामा का नया कैसेट किसी भी समय आ सकता है. रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई का कहना था कि मुल्ला उमर को फ़ायदा ये है कि वे अफ़ग़ान है और पश्तो जानते हैं और दुनिया को बहुत कम पता है कि वे कैसे नज़र आते हैं क्योंकि उनकी ज़्यादा तस्वीरें नहीं छपी हैं. उनका कहना था, "मुल्ला उमर अपने लोगों के बीच, अपने क़बीले में रहते हैं और जहाँ तक मुझे पता है उन्हें कोई ख़ास दिक्कत पेश नहीं आ रही. सक्रीय तालेबान कार्यकर्ता उनकी हर कीमत पर सुरक्षा करेंगे. वे आसानी से पाकिस्तान में भी जा सकते हैं." अफ़ग़ानिस्तान मामलों के विशेषज्ञ रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई का कहना था, "ओसामा चाहे पश्तो या उर्दू नहीं जानते क्योंकि वे केवल अरबी बोलते हैं, इसलिए उनका आना-जाना तो सीमित क्षेत्र में ही होगा. लेकिन उनके कैसेट समय-समय पर आते हैं, और आख़िरी बार ऐसा कैसेट अक्तूबर में आया था. संभावना है कि उनका ताज़ा कैसेट अब कभी भी आ सकता है." उनका कहना था कि पूरे क्षेत्र में अमरीका-विरोधी भावना व्याप्त होने कारण लोग ओसामा और मुल्ला उमर को शरण दे रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि जिस तरह अमरीकियों ने आठ महीने में सद्दाम हुसैन का पता लगा लिया यदि ओसामा को स्थानीय लोगों का समर्थन न होता तो उनका पता भी अब तक चल ही जाता. राष्ट्रपति हामिद करज़ई की तालेबान लड़ाकों को मुख्यधारा में शामिल होने की ताज़ा पेशकश के बारे में रहीमुल्ला का कहना था कि पश्तून इलाक़ों में दक्षिण और पूर्वी क्षेत्र में अब भी तालेबान को काफ़ी समर्थन हासिल है और करज़ई सरकार का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो उनकी सरकार को इससे बल मिलेगा. उनका कहना था कि सड़कें बनाने, सिंचाई की व्यवस्था करने और स्कूल इत्यादि बनाने का काम अब भी काफ़ी धीमी गति से चल रहा है. उनका कहना था कि करज़ई सरकार में विश्वास के मुद्दे पर सवालिया निशान लगा हुआ है क्योंकि जो वादे किए गए थे वे अभी पूरे नहीं हुए हैं. |
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