| भारत-रूस में परमाणु ऊर्जा सहयोग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और रूस परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग करने पर राज़ी हुए हैं. रूस के दौरे पर गए भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच सोमवार को मुलाक़ात के बाद ये घोषणा की गई है. राजधानी मॉस्को में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति की 60 वीं वर्षगाँठ के मौक़े पर हुए समारोह में शामिल होने के लिए इकट्ठा हुए थे. भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इसी समारोह में शामिल होने के लिए मॉस्को गए थे. दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद रूस के एक प्रवक्ता ने कहा कि रूस भारत में कुछ और परमाणु रिएक्टर बना सकता है ताकि भारत में बढ़ती बिजली की ज़रूरतों को पूरा किया जा सके. रूस पहले से ही दक्षिणी भारत में कुंडनकुलन में एक परमाणु संयंत्र बनाने में मदद कर रहा है. दोनों नेताओं के बीच इस बात पर भी सहमति हुई कि व्यापार और आर्थिक संबंध मज़बूत करने के लिए एक संयुक्त कार्य दल का गठन किया जाएगा. दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने पत्रकारों को बताया कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग पर भी बातचीत हुई है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भरोसा दिलाया कि वह हमेशा भारत के साथ रहे हैं और भविष्य में भी हमेशा साथ रहेंगे. |
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