|
बुश ने 'सोवियत भूलों' की याद दिलाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने शीत युद्ध के दौरान मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों पर सोवियत संघ के प्रभुत्व को इतिहास की सबसे बड़ी ग़लतियों में से एक बताया है. लेकिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नाज़ी जर्मनी को हराने में रूसी सेनाओं की उपलब्धियों की तारीफ़ की है. पुतिन ने कहा है कि सोवियत सेनाओं ने फासीवाद और नाज़ीवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में बहादुरी का परिचय देते हुए 11 यूरोपीय देशों को आज़ाद कराया था. अपने यूरोपीय दौरे के पहले चरण में लातविया में उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के विभाजन के लिए कुछ हद तक अमरीका भी ज़िम्मेदार है. अमरीकी राष्ट्रपति दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति की साठवीं वार्षिकी के मौक़े पर यूरोप का दौरा कर रहे हैं. लातविया में उन्होंने नाज़ी दौर के पीड़ितों के बारे में बात नहीं की बल्कि राजधानी रीगा के आज़ादी के स्मारक पर सोवियत दमन के शिकार लोगों को श्रद्धांजलि देकर उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत की. राष्ट्रपति बुश ने लातविया में लोकतंत्र की स्थापना की वकालत करते हुए वहाँ के लोगों की आज़ादी के प्रति भावनाओं की सराहना की. उन्होंने कहा, "इस देश में आकर इतनी खुशी हो रही है जहाँ लोग आज़ादी की कीमत समझते हैं. मैं यहाँ पर मौजूद राष्ट्रपति वाइरा वाइकी फ़्राइबेर्गा की क़द्र करता हूं जो इतनी साफ़ग़ोई से लोगों की आज़ादी के बुनियादी अधिकार की बात करती हैं." बहिष्कार राष्ट्रपति बुश मास्को में सोमवार को तत्कालीन सोवियत संघ और नाज़ी जर्मनी के बीच युद्ध की याद में आयोजित होने वाले एक विशेष समारोह में भाग लेंगे. लेकिन लिथुएनिया और एस्तोनिया सहित कुछ बाल्टिक देशों ने मॉस्को में होने वाले समारोह का बहिष्कार करने का फैसला किया है. जॉर्ज बुश ने इन देशों के नेताओं से मुलाक़ात की, और बाल्टिक देशों के दर्दनाक इतिहास के संदर्भ में इस मुद्दे पर उनके साथ सहमति जताई. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन राष्ट्रपति बुश की बाल्टिक देशों की इस यात्रा के कार्यक्रम से पहले ही नाराज़ हैं, और ऐसे में इन देशों के इन नेताओं की इस मांग से तो उनकी नाराज़गी और बढ़ गई है, जिसमे उन्होंने कहा है कि रूस को इन तीन देशों पर किये 'अत्याचारों' के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए. राष्ट्रपति पुतिन ये भी जानते हैं कि अमरीकी राष्ट्रपति बाल्टिक देशों पर रूस के प्रभुत्व को पसंद नहीं करते. वैसै भी वॉशिंगटन से रवाना होने से पहले राष्ट्रपति बुश पहले ही कह चुके हैं कि वे रूस से बाल्टिक देशों पर अपना प्रभुत्व ख़त्म करने को कहेंगे. राष्ट्रपति बुश की मंशा रूस को ये याद दिलाने की भी है कि नाज़ी जर्मनी की हार के बाद 'दमनकारी कम्युनिस्ट शासन' की शुरूआत उसी ने की थी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||