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विश्वयुद्ध के सैनिकों को याद किया गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस के नॉरमैंडी शहर में दूसरे विश्वयुद्ध के सबसे बड़े सैनिक अभियान डी-डे की रविवार को 60वीं वर्षगाँठ में हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. 'नॉरमैंडी की लड़ाई' को अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त सैनिक अभियान माना जाता है. छह जून 1944 को एक लाख 56 हज़ार सैनिकों ने जर्मन सैनिकों के ख़िलाफ़ इस अभियान में भाग लिया जिसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध को एक निर्णायक मोड़ मिला. रविवार को नॉर्मैंडी के ओमाहा तट पर सैकड़ों पूर्व सैनिकों ने उस दिन की याद में कुछ देर के लिए मौन रखा. समारोह में भाग लेने के लिए 17 देशों के प्रमुख नॉर्मैंडी में एकत्र हुए और बहुत से ऐसे सैनिक शामिल थे जिन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया था. इस समारोह की ख़ास बात ये थी कि इसमें उन पूर्व सैनिकों ने भी हिस्सा लिया जो दूसरे विश्वयुद्ध में एक दूसरे के ख़िलाफ़ लड़े थे. मुख्य समारोह एरोमांसेज़ तट पर हुआ जहाँ दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान कुछ विमान उतरे थे और जहाज़ भी तैनात थे. पूर्व सैनिकों के मार्च पास्ट को देखने के लिए बहुत से देशों के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद थे. इनमें अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यु बुश और ब्रिटेन की महारानी एलिज़बेथ भी शामिल थीं. अन्य 15 राष्ट्राध्यक्षों में जर्मन चांसलर गेरहार्ड श्रोडर और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस समारोह में आए और दोनों ही अपने-अपने देश के ऐसे पहले नेता बन गए जिन्होंने डी-डे समारोह में भाग लिया. 1994 में नॉर्मैंडी की लड़ाई की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर भी रूस को निमंत्रण नहीं दिया गया था. जर्मनी के चांसलर गेरहार्ड श्रोडर ने कहा कि नॉर्मैंडी में आने के निमंत्रण ने उनके मन को छू लिया है जिससे लगता है कि युद्ध के बाद के युग का अंत हो चुका है. |
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