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'नॉरमैंडी की लड़ाई' की 60वीं वर्षगाँठ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के इतिहास में सबसे बड़े संयुक्त सैनिक अभियान 'नॉरमैंडी की लड़ाई' की 60वीं वर्षगाँठ पर फ़्रांस में एक बड़ा आयोजन किया गया है. छह जून 1944 को एक लाख 56 हज़ार सैनिकों ने इस अभियान में भाग लिया और सैनिक इतिहास में माना जाता है कि इससे द्वितीय विश्व युद्ध को एक निर्णायक मोड़ मिला. 'मित्र देशों' की सेना के इस अभियान को पश्चिमी देशों में डी-डे के नाम से जाना जाता है और माना जाता है कि जर्मनी की हार में इसकी एक अहम भूमिका थी. लगभग एक साल से इस अभियान की तैयारी चल रही थी और इसमें अमरीका और कनाडा के सैनिकों ने ब्रितानी सैनिकों के साथ भाग लिया था. बड़ा आयोजन डी-डे की 60वीं सालगिरह के मौक़े पर नॉरमैंडी में हज़ारों की संख्या में वो सैनिक पहुँचने शुरु हो गए हैं जिन्होंने इस अभियान में हिस्सा लिया था. ब्रिटेन से ही लगभग बारह हज़ार पूर्व सैनिक छह जून की याद में उसी तरीके से समुद्री जहाज़ों के साथ नावों में इंग्लिश चैनल पार कर रहे हैं. रविवार और मंगलवार को इस ऐतिहासिक लड़ाई को याद करने के लिए कई समारोह आयोजित किए जाएँगे और 17 राष्ट्राध्यक्ष भाग लेंगे. ब्रिटेन की महारानी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, फ़्रांस के राष्ट्रपति ज्याक शिराक, रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन और पहली जर्मनी के चांसलर गेरहर्ड श्रोएडर भाग ले रहे हैं. नॉरमैंडी अभियान की एक साल तक तैयारी हुई थी और वायुसेना और नौसेना ने मिलकर हमला किया था. इसमें 6000 समुद्री जहाज़ों ने भाग लिया था. |
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