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जम्मू-उधमपुर रेल लाइन को हरी झंडी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को 55 किलोमीटर लंबी जम्मू-उधमपुर रेल लाइन का उदघाटन किया. प्रधानमंत्री ने इस रेल लाइन पर उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाते हुए इसे कश्मीर वादी को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम बताया. प्रधानमंत्री का कहना था कि यह रेल लाइन भारत प्रशासित कश्मीर में शांति और विकास के उनकी सरकार के वादे का एक हिस्सा है. मनमोहन सिंह ने भरोसा जताया कि जम्मू-बारामूला रेल लाइन के पूरा होने के बाद सन् 2007 में कश्मीरवादी से देश को जोड़नेवाली पहली ट्रेन चल सकेगी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर के विकास लिए 1000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. पचपन किलोमीटर की यह रेल लाइन जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लाइन का एक हिस्सा है. लंबी अवधि जम्मू- उधमपुर रेल परियोजना पर लगभग 515 करोड़ रुपए की लागत आई है. लेकिन इसको पूरा होने में दो दशक से अधिक वक्त लगा. यह रेल लाइन पहाड़ों से होकर गुज़रती है और इसके रास्ते में 158 पुल पड़ते हैं और लगभग 20 सुरंगें पड़ती हैं जिसमें से एक लगभग ढाई किलोमीटर लंबी है. इस रेल सेवा के उदघाटन के मौक़े पर रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव भी मौजूद थे. इसके लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और रेलवे सुरक्षा बल और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए थे. इस रेल लाइन का शिलान्यास 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने किया था. |
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