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हवा में लटक कर चलती एक ट्रेन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हवा में लटक कर चलती एक ट्रेन. दुनिया के लिए एक आश्चर्य, लेकिन अब वह हकीकत बन चुका है. भारत के 'मिनी यूरोप' कहे जाने वाले गोवा में पहली ऐसी दो बोगियों वाली ट्रेन का संचालन सफल होने के बाद देश के 13 महानगरों और सात दूसरे देशों की शहरी परिवहन प्रणाली में यह एक बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन हो सकता है. 'स्काई बस मेट्रो' प्रणाली नाम की यह खोज भारत ही नहीं दुनिया के महानगरों में जनसंख्या विस्फोट से ध्वस्त हो रहे परिवहन के साधनों का एक अच्छा विकल्प होगा. मगर सिर्फ़ इतना ही नहीं ये ध्वनि-वायु प्रदूषण, 'ट्रैफिक जाम' और नित नई दुर्घटनाओं को समाप्त कर काम-काज करने वाले दैनिक यात्रियों को सहज एवं आरामदायक ढंग से उनका सफ़र भी तय कराएगा. भारतीय रेल का उपक्रम कोंकण रेलवे पिछले पाँच वर्षों से 'स्काई बस मेट्रो' पर काम कर रहा है. इस नई प्रौद्योगिकी को 1989 में रेलवे अनुसंधान के लिए 'वर्ल्ड कांग्रेस' में प्रस्तुत 'स्काई व्हील' की सोच से कोंकण रेलवे ने लिया और आज वह अवधारणा हकीकत में बदल रही है. कोंकण रेलवे के महाप्रबंधक बी राजाराम ने स्काई बस ट्रेन की योजना 1999 में तैयार कर ली थी, लेकिन भारत सरकार और किसी भी राज्य सरकार ने उसे मंजूरी नहीं दी. वैसे वह भी इसे 'हवा में लटकती ट्रेन' ही कहते हैं. देश-विदेश सभी जगहों से यही कहा गया कि 'इस नए प्रयोग को जमीन पर उतारो'. अंततः कोंकण रेलवे ने गोवा के मडगाँव में स्वयं 1.6 किलोमीटर मार्ग की स्काई बस मेट्रो परियोजना शुरु की. एक वर्ष के अंदर आधा किलोमीटर का मार्ग तैयार हो चुका है. इसका परीक्षण अगस्त 2004 के प्रथम सप्ताह में किसी भी दिन किया जाना है. शेष कार्य नवंबर 2004 में पूरा हो जाएगा, जिससे विश्व भर से ख़ासतौर पर यूरोप से आने वाले पयर्टक स्काई बस में बैठकर ऊपर से गोवा के सौंदर्य को देख सकें. इसमें निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भी पूँजी लगाई है. कम लागत महागरीय यातायात में 'स्काई बस' प्रणाली दुनिया भर में अपनाई जा रही परिवहन प्रणालियों में अपनी लागत, कीमत एवं कम समय में तैयार हो सकने वाली प्रणाली है. दस किलोमीटर मार्ग के लिए भूमिगत 'मेट्रो' की लागत तीन हज़ार करोड़ रुपए के साथ वह सात से 10 वर्ष में तैयार हो पाती है. वहीं 'एलीवेटिड मेट्रो' 1200 करोड़ रुपए के साथ पाँच से सात वर्ष में तैयार हो पाता है. इन सबकी तुलना में 'स्काई बस' पाँच सौ करोड़ रुपए में सिर्फ़ दो वर्ष में तैयार हो सकती है.
कोंकण रेलवे ने गोवा में यह कर दिखाया है. 1.6 किलोमीटर का मार्ग 50 करोड़ रुपए की लागत में एक वर्ष के अंदर तैयार हो जाने की संभावना है. इसके बाद कोंकण रेलवे का मानना है कि देश के 13 महानगरों और सात देशों में उसके पहले से पड़े प्रस्तावों पर से धूल साफ हो जाएगी. देश की राजधानी दिल्ली में 124.9 किलोमीटर, मुम्बई में 85.6 किलोमीटर, चेन्नई में 12, अहमदाबाद में 63.3, बंगलौर में 21.2, कोयम्बटूर में 28.2, हैदराबाद में 169, कोच्चि में 23.1, कोलकाता में 26, लखनऊ में 17-19, पुणे में 87.4 और थाणे में 14 किलोमीटर मार्ग पर 'स्काई बस मेट्रो' के पहले से लंबित प्रस्ताव को मंज़ूरी मिल जाएगी. गोवा में कुल 76 किलोमीटर मार्ग पर 'स्काई बस मेट्रो' बनाना है. इस तरह देश में कुल 595.6 किलोमीटर मार्ग पर 26643.3 करोड़ रूपए की लागत से 'स्काई बस' की योजना प्रस्तावित है. वहीं दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और केरल की राज्य सरकारों ने एक वर्ष पहले ही प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी थी लेकिन इस शर्त पर कि इस नई परियोजना को पहले कहीं सफलतापूर्वक चलाकर देखा जाए. हालाँकि कोलकाता के बाद दिल्ली में भूमिगत मेट्रो का काम भी युद्ध स्तर पर चल रहा है, लेकिन उसमें भारी लागत, विस्थापन और समय लग रहा है. इसलिए भी सबकी नजरें स्काई बस पर हैं. सुविधा, सुरक्षा और तकनीक भूमिगत एवं उपरिगत 'मेट्रो ट्रेनों' की लागत, अधिक लगने वाला समय, आबादी का विस्थापन आदि खर्चों को जोड़ने पर प्रति व्यक्ति उसका किराया महँगा पड़ता है. वहीं स्काई बस में प्रति किलोमीटर मात्र 15 पैसे पड़ते हैं. इसमें लगाए जाने वाले दो कोच पूर्णतया वातानुकूलित हैं, जो 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकते हैं और इनकी सेवा हर एक मिनट के अंतराल पर चलाई जा सकती है. 'मेट्रो ट्रेन' की अन्य तकनीकियों में दुर्घटना होने पर और उसमें भी ख़ासतौर पर भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में जान-माल की भीषण क्षति हो सकती है. वहीं स्काई बस सड़कों के डिवाइडर पर बने खम्बों पर लगे लोहे के गाडरों से लटककर चलेगी और उसके गिरने की संभावना शून्य है. साथ ही आपात स्थिति आने पर कोच से यात्रियों को सेकेंडों में सुरक्षित सड़क पर उतारने के लिए हवा से भरे हुए ढालदार गद्दे लगे हैं, जो ट्रेन के रूकने पर अपने आप ही खुल जाएँगे. विदेशों में भी है ललक भारत के अलावा कोंकण रेलवे ने सऊदी अरब में मुसलमानों के पवित्र स्थल मदीना से मक्का के बीच 75 किलोमीटर के मार्ग पर स्काई बस मेट्रो बनाने का सर्वेक्षण कार्य पूरा किया है. लगभग 700 करोड़ डॉलर की लागत से तैयार होने वाले इस मार्ग पर प्रतिवर्ष दुनिया भर से लाखों हाजी हज करने के लिए आते हैं. इसी तरह सिंगापुर में 25, सीरिया के दमिश्क में 34, दुबई-शरजाह में 12, दुबई में 69.1और बांग्लादेश के ढाका में 23.1 किलोमीटर मार्ग पर सर्वेक्षण कार्य हुआ है. इन सभी देशों ने स्काई बस को कहीं चला लेने के बाद उसकी सफलता को देख कर अपने यहाँ स्वीकृति देने का वादा किया है. विदेशों में सर्वाधिक बड़ा आश्वासन कोंकण रेलवे को अगस्त 2001 में इराक़ की तत्कालीन सद्दाम हुसैन सरकार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके दिया था. इराक़ से हुए समझौते में बगदाद के 11.6 किलोमीटर मार्ग पर 268 मिलियन डॉलर की लागत से स्काई बस मेट्रो का निर्माण किया जाना था. कोंकण रेलवे के साथ समझौता ज्ञापन पर इराक़ सरकार की ओर से हस्ताक्षर किया गया था लेकिन अब इराक़ के हालात और सरकार कभी बदल चुकी है. बीस लाख की जनसंख्या वाले शहरों में जहाँ दो से तीन लाख की आबादी रोजाना एक ख़ास मार्ग पर आती जाती हो वहाँ स्काई बस बेहतरीन विकल्प है. फ़िलहाल कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड ने स्काई बस की तकनीक सामने लाकर आकाश को भी सीमित करने का अपना लक्ष्य पूरा कर दिखाया है. |
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