 |  नेपाल में सैनिक और माओवादी विद्रोही दोनों ही कर रहे हैं मानवाधिकारों का उल्लंघन |
नेपाल ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षकों को देश में जाने की अनुमति दी जाएगी. ये पर्यवेक्षक मानवाधिकार उल्लंघन के घटनाओं की निगरानी करेंगे. नेपाल के इस फैसले से कुछ ही घंटों पहले जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की बैठक हुई थी जिसमें नेपाल की कड़ी भर्त्सना की गई. इसके तुरंत बाद नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षकों को देश में आने की अनुमति दी.इसी कारण बैठक में पारित किया जाने वाला एक गंभीर प्रस्ताव रोक लिया गया. नेपाल में संयुक्त राष्ट्र का पहला मानवाधिकार कार्यालय काठमांडू में खोला जाएगा. ये पर्यवेक्षक सरकारी सेनाओं और माओवादी विद्रोहियों के साथ मिलकर काम करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं की पूरी जांच हो सके. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों के उच्चायुक्त लुइस आरबर ने उम्मीद जताई कि नेपाल के इस कदम से वहां मानवाधिकार उल्लंघन की बढ़ती घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकेगी. विभिन्न मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि फरवरी महीने में नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र के सत्ता हाथ में लेने के बाद से वहां मानवाधिकार उललंघन की घटनाओं में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है. नेपाल नरेश ने पिछले दिनों आपातकाल को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है जिसके तहत बिना सुनवाई के किसी को भी एक साल तक जेल में रखा जा सकता है. |