|
श्रीनगर से रावलपिंडी वाया मुज़फ़्फ़राबाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उनसे कहा गया कि अगले दिन से रास्ता बंद होने वाला है और वे चाहें तो रावलपिंडी में रह जाएँ और चाहें तो कश्मीर वापस चले जाएँ. और 1947 के उस दिन अब्दुल गनी मीर अपनी शेवरले बस लेकर कश्मीर आ गए. श्रीनगर से रावलपिंडी तक चलने वाली उनकी बस बंद हो गई और तब से आज तक इस रास्ते पर कोई बस नहीं चली. यह वही रास्ता है जो श्रीनगर से मुज़फ़्फ़राबाद होकर रावलपिंडी तक जाता है. आज अब्दुल गनी मीर बिस्तर पर बीमार पड़े अपना बुढ़ापा काट रहे हैं और दुआ माँग रहे हैं कि दोनों मुल्कों के रिश्ते सुधर जाएँ तो कश्मीर के दिन बदलें. पुरानी यादें पुराने दिनों की याद करते हुए उनके बलगम भरे गले से हँसने की आवाज़ निकलती है और उनकी कमज़ोर आँखों में चमक सी आ जाती है. उनका कहना है कि जब पत्नी और तीन बच्चे श्रीनगर में थे तो उनके पास वापस लौटना ही एकमात्र विकल्प था. वे याद करते हैं कि उनकी शेवरले गाड़ी 17 पास थी यानी 17 यात्रियों को लाने ले जाने की अनुमति थी लेकिन वे आठ या नौ सवारियाँ बिठाते थे और बाक़ी सामान लादते थे. श्रीनगर के डलगेट इलाक़े में अपने घर पर बीबीसी हिंदी से बात करते हुए अब्दुल गनी मीर ने कहा, “यहाँ से सेब की पेटियाँ जाती थीं, अखरोट और बादाम जाता था और वहाँ से नमक और मसाले आते थे.” वे बताते हैं कि उन दिनों श्रीनगर से रावलपिंडी के रास्ते पर कुल 22 सवारी गाड़ियाँ चलती थीं जिनमें से एक उनकी गाड़ी भी थी. लेकिन रास्ता बंद हो गया तो फिर वे अपनी गाड़ी लेकर अनंतनाग जाने लगे लेकिन इससे उनका नुक़सान बहुत हुआ जिसे वे आज तक नहीं भूले हैं. ख़ुशी वे इस बात पर ख़ुश हैं कि श्रीनगर रावलपिंडी के रास्ते पर फिर से बस चलाने की बात हो रही है. वे कहते हैं, “हम ख़ुश हैं यह ख़ुदा जानता है, वे एक होंगे या नहीं ये तो ख़ुदा जाने लेकिन पचाल साल हो गए खून ख़राबा करते हुए अब ये बंद होना चाहिए.” उनके तीनों बेटे अब अपने काम धँधों में लगे हुए हैं और उनमें से दो तो टैक्सी ही चलाते हैं, उनके पोते अब बड़े हो गए हैं. लेकिन पचहत्तर पार के इस बूढ़े अब्दुल गनी मीर का दिल अब भी उछल पड़ता है जब बस चलाने की बात होती है. उन्होंने लपककर कहा, “अगर ठीक हो जाऊँगा तो बस चलाकर मैं ही ले जाऊँगा, ये मेरा शौक है ये मेरा ख़ुदा जानता है.” फिर वे अपने पोपले मुँह से हँस देते हैं और उनकी आँखें नम हो जाती हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||