BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 16 फ़रवरी, 2005 को 13:50 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
कश्मीरियों की मिलीजुली प्रतिक्रिया

मुज़फ़्फ़राबाद मार्ग
श्रीनगर-मुज़फ्फ़राबाद बस मामले में प्रगति की पहले से ही उम्मीद थी
भारत और पाकिस्तान ने दोनों तरफ़ के कश्मीर के बीच सड़क संपर्क बहाल करने का जो फ़ैसला किया है उस पर कश्मीरी लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया रही है.

ग़ौरतलब है कि समझौते के तहत भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद के बीच सड़क संपर्क बहाल किया जाएगा.

भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपने पाकिस्तान दौरे के दौरान बुधवार को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी से मुलाक़ात की जिसके बाद इस समझौते की पुष्टि की गई.

भारत प्रशासित कश्मीर में भारत सरकार समर्थक नेताओं ने इस समझौते का स्वागत किया है लेकिन पृथकतावादी दलों में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय नज़र आई.

ख़ासतौर से जिन लोगों के परिवार नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ़ के कश्मीरी हिस्सों में रहते हैं, उन्होंने इस समझौते प्रसन्नता ज़ाहिर की है.

श्रीनगर में एक दुकानदार मोहम्मद मक़बूलस का कहना था कि इस समझौते ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहने वाले उनके रिश्तेदारों से मिलने की उम्मीद जगा दी है.

"अपनों के अलग रहने का दुख वही जानते हैं जो अपनों से बिछड़े हुए हैं."

मोहम्मद मक़बूल के बहुत से रिश्तेदार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहते हैं.

एक नेता ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, "मुझे यक़ीन ही नहीं हो रहा है. यह ख़बर सुनकर बरबस ही मेरी आँखें भर आई हैं."

एक वाहन चालक अब्दुल मजीद का कहना था, "बस सेवा शुरू होने का स्वागत किया जाना चाहिए बशर्ते कि इससे कश्मीर समस्या का समाधान निकले और ख़ूनख़राबा बंद हो सके. अन्यथा इसका कोई फ़ायदा नहीं है."

एक नागरिक ग़ुलाम नबी ने अलबत्ता कुछ ग़ुस्से का इज़हार किया, "मुझे यक़ीन नहीं हो रहा है कि कश्मीरियों की क़ुर्बानियों को इस तरह दाँव पर लगा दिया जाएगा. कश्मीर पर असली विवाद को सुलझाया जाना चाहिए."

सर्वदलीय हुर्रियत कान्फ्रेंस के उदारवादी धड़े के नेताओं से प्रतिक्रिया के लिए संपर्क नहीं किया जा सका.

लेकिन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता जावेद अहमद मीर ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह कश्मीर विवाद को हल करने की दिशा में पहला क़दम है.

हुर्रियत कान्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने आरोप लगाया कि दोनों देश एक ग़ैर ज़रूरी मुद्दे पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे हैं और मुख्य मुद्दे को किनारे कर दिया गया है.

गिलानी ने कहा, "हज़ारों लोगों ने अपनी जान की क़ुर्बानी दी है और बाक़ी आबादी ख़तरनाक क़ानूनों की शिकार है. सिर्फ़ बस सेवा शुरू किए जाने से कश्मीरियों के दुखों का अंत नहीं होगा."

दो चरमपंथी संगठनों अल मंसूरियन और जमायतुल मुजाहिदीन ने समझौते का विरोध किया है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>