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मुज़फ़्फ़राबाद नहीं जा सकेंगे कश्मीरी नेता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सात अप्रैल को श्रीनगर से मुज़फ़्फ़राबाद जाने वाली बस के साथ भारत राजनीतिक नेताओं के जाने के अनुरोध को ठुकरा दिया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय अधिकारियों को एक संदेश भेजा है जिसमें कहा गया है कि यह प्रावधान कश्मीर के सिर्फ़ उन लोगों के लिए जो अपने परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए मुज़फ़्फराबाद जाना चाहते हैं. भारत के आठ प्रमुख कश्मीरी राजनीतिक नेताओं ने मुज़फ़्फ़राबाद जाने की अनुमति माँगी थी, इनमें राज्य के उप मुख्यमंत्री कांग्रेस पार्टी के मंगतराम शर्मा भी शामिल हैं. इस बस से मुज़फ़्फ़राबाद जाने की अर्ज़ी देने वालों में शामिल नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व विदेश राज्य मंत्री उमर अब्दुल्ला ने बीबीसी से बातचीत में पाकिस्तान के इस फ़ैसले पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है. उन्होंने कहा कि उनका मक़सद इस ऐतिहासिक यात्रा का राजनीतिकरण करना नहीं है बल्कि वे जम्मू कश्मीर की जनता का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी सरकार को आठ लोगों की सूची भेजी थी और कहा था कि इन लोगों एक अलग वाहन में मुज़फ़्फ़राबाद तक जाने की अनुमति दी जाए. भारत की ओर से प्रस्तावित सूची के नाम हैं-- उमर अब्दुल्ला और उनकी ही पार्टी के अब्दुल रहीम राथेर, जम्मू कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी पीडीपी की नेता महबूबा मुफ़्ती और उन्हीं की पार्टी के रंगील सिंह, उप मुख्यमंत्री मंगतराम शर्मा, ग्रामीण विकास मंत्री पीरज़ादा मोहम्मद सईद, पैंथर्स पार्टी के प्रमुख भीम सिंह और सीपीएम के नेता यूसुफ़ तारीगामी. भारत सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के दो कश्मीरी नेताओं का नाम भी इस यात्रा के लिए प्रस्तावित किया था लेकिन निर्मल सिंह और केडी सेठी ने इस यात्रा के लिए पासपोर्ट का इस्तेमाल नहीं किए जाने के विरोध में यात्रा करने से इनकार कर दिया. इस बस यात्रा के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने 29 लोगों के नामों को अब तक मंज़ूरी दी है, इनमें से अधिकतर लोग राजौरी, बारामूला और श्रीनगर और पुँछ के रहने वाले हैं. |
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