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आवेदन पत्र न मिलने से निराशा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय कश्मीर में श्रीनगर से मुज़फ्फराबाद तक बस यात्रा करने के लिए विशेष परमिट पाने के लिए आवेदन करने के लिए सैकड़ों लोगों की क़तारें लगी थीं लेकिन बहुत सारे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा. जम्मू कश्मीर सरकार के अधिकारियों ने सात अप्रैल से चलने वाली बस के लिए सिर्फ़ 100 आवेदन पत्र ही बाँटे. कश्मीर के भारत प्रशासित और पाकिस्तान प्रशासित हिस्सों में हज़ारों परिवार ऐसे हैं जो नियंत्रण रेखा के दोनों ओर बँटे हुए हैं. ऐसे हज़ारों लोगों को लगता है कि श्रीनगर से मुज़फ़्फराबाद के बीच बस सेवा शुरू होने से वे अपने परिवार के बिछड़े हुए सदस्यों से दोबारा जुड़ जाएँगे. कश्मीर के दोनों हिस्सों की राजधानियों को जोड़ने वाली इस बस में बैठने के लिए वीज़ा पासपोर्ट नहीं बल्कि एक विशेष ट्रेवल परमिट का प्रावधान किया गया है और यह सुविधा सिर्फ़ भारतीय और पाकिस्तानी लोगों के लिए है, इस बस में विदेशी नागरिक यात्रा नहीं कर सकेंगे. श्रीनगर में पासपोर्ट अधिकारी ने पत्रकारों को बताया, "हमने नियंत्रण रेखा के उस पार जाने के इच्छुक एक सौ लोगों को आवेदनपत्र दिया है." इन आवेदनों को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर भेजा जाएगा, वहाँ से स्वीकृति मिलने के बाद ही परमिट जारी किया जाएगा. ग़ुस्सा कई कश्मीरी लोगों में इस बात को लेकर ग़ुस्सा है कि इस बस सेवा के बारे में सरकार पर्याप्त जानकारी नहीं दे रही है. अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए बेताब मोहम्मद मक़बूल ने कहा, "इस बस सेवा के बारे में मीडिया के ज़रिए जानकारी दी जानी चाहिए थी, हम तो बिना मतलब ही उत्साहित हो रहे थे." इसी तरह की बात फ़रहद अंद्राबी ने भी कहीं जिनकी बहन मुज़फ्फराबाद में रहती हैं, उन्होंने कहा, "कम से कम अख़बारों के ज़रिए ही बता देते कि आवेदन पत्र मिल रहे हैं, हमें तो पता ही नहीं था." श्रीनगर से बाहर रहने वालों ने तो और भी शिकायतें कीं कि उन्हें जब तक पता चलता तब तक फॉर्म बँट चुके थे. जिन्हें फॉर्म मिल गया उनकी तो मानो लॉटरी निकल आई हो, मोहम्मद शफ़ी ने उत्साहित होकर कहा, "शुक्र है अल्लाह का, मुझे फॉर्म मिल गया है, मैं उम्मीद करता हूँ कि इसी तरह परमिट भी मिल जाएगा." |
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