| पाकिस्तान में अमरीका का प्रचार अभियान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अल क़ायदा के प्रमुख चरमपंथियों के बारे में पाकिस्तान में चलाए जा रहे टेलीविज़न और रेडियो प्रचार का अच्छा असर हो रहा है. अधिकारियों का कहना है कि जिन संदिग्ध अल क़ायदा चरमपंथियों के पाकिस्तान में छिपे होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, उनके बारे में इस प्रचार अभियान से महत्वपूर्ण सूचनाएँ मिल रही हैं. हालाँकि अमरीकी अधिकारियों ने सूचनाओं के बारे में कुछ नहीं बताया. पाकिस्तान में चल रहे टीवी और रेडियो पर प्रचार अभियान में ओसामा बिन लादेन सहित अल क़ायदा के 14 शीर्ष चरमपंथियों के बारे में सूचनाएँ देने पर इनाम देने की पेशकश की गई है. अल क़ायदा ओसामा बिन लादेन के बारे में कहा जाता है कि वे पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के सीमावर्ती जनजातीय इलाक़े में छिपे हैं. इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता पॉल एंडरसन का कहना है कि तीन साल से चल रही लादेन की तलाश में उनका कोई सुराग नहीं मिला है. प्रचार अभियान पाकिस्तान टीवी पर 30 सेकेंड के विज्ञापन में लोगों से भावुक अपील की गई है. ओसामा बिन लादेन, आयमन अल ज़वाहिरी और तालेबान नेता मुल्ला उमर की तस्वीरों दिखाई जाती हैं और साथ में ये आवाज़ गूँजती है- आतंकवादियों को कौन रोक सकता है? सिर्फ़ आप. बीबीसी संवाददाता पॉल एंडरसन का कहना है कि हालाँकि इसके कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि ये चरमपंथी यहीं छिपे हैं, लेकिन आम तौर पर यही माना जा रहा है कि ये सभी अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के पहाड़ी इलाक़ों में छिपे हैं. टीवी और रेडियो पर ये विज्ञापन पाकिस्तान की चार प्रमुख भाषाओं में प्रसारित किए जा रहे हैं. ये हैं- उर्दू, पश्तो, सिंधी और बलोच. इससे यही साबित होता है कि अमरीकी अधिकारी मानते हैं कि अल क़ायदा के शीर्ष 14 चरमपंथी पाकिस्तान में ही कहीं छिपे हो सकते हैं.
अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि विज्ञापन के बाद अभी तक उनके पास 25 से ज़्यादा फ़ोन आए हैं. जिनमें से कुछ में उन्हें महत्वपूर्ण सूचनाएँ मिली हैं. लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया है कि लादेन के बारे में कोई सूचना मिली है या नहीं. अल क़ायदा प्रमुख लादेन और उनके साथी ज़वाहिरी के लिए इनामी राशि 50 लाख डॉलर से लेकर दो करोड़ 50 लाख डॉलर तक है. अमरीका का यह प्रचार अभियान उनके 'न्याय के लिए इनाम' कार्यक्रम का हिस्सा है. इस कार्यक्रम के शुरू होने के बाद अभी तक 40 से ज़्यादा मुखबिरों को पाँच करोड़ 70 लाख डॉलर का इनाम दिया जा चुका है. पाकिस्तान में इस अभियान के लिए शुरू में अमरीका को सरकारी सहायता नहीं मिल पा रही थी. क्योंकि पाकिस्तान में अमरीका के प्रति अच्छी भावना नहीं है और सरकार इस प्रचार अभियान से अपने को नहीं जोड़ना चाहती थी. |
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