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बेनज़ीर और नवाज़ ने हाथ मिलाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो ने देश में लोकतंत्र बहाली के लिए एक तीन सूत्री समझौते पर दस्तख़त किए हैं. दोनों नेताओं के बीच यह समझौता गुरूवार को सऊदी अरब के शहर जद्दाह में हुआ और विपक्षी नेता के रूप में उनकी यह बिल्कुल पहली मुलाक़ात थी. ग़ौरतलब है कि दोनों ही नेता एक दूसरे के प्रधानमंत्रित्वकाल में विपक्षी नेता रह चुके हैं. समझौते में में पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली, एक स्वतंत्र चुनाव आयोग का गठन और जनादेश को सम्मान देने का आहवान किया गया है. दोनों नेता देश से बाहर हैं और मौजूदा राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के शासन के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे हैं. बेनज़ीर भुट्टो ने 1996 में सेना द्वारा सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही ख़ुद देश से रानीतिक निर्वासन ले रखा है और वह दुबई और लंदन में रहती हैं. नवाज़ शरीफ़ को अक्तूबर 2000 में सत्ता से हटाए जाने के कुछ महीने बाद ही एक समझौते के तहत सऊदी अरब भेज दिया गया था. इस समझौते के तहत नवाज़ शरीफ़ 2010 तक पाकिस्तान वापस नहीं लौट सकते हैं. कुछ मुद्दे पाकिस्तान के पूर्व केंद्रीय मंत्री और नवाज़ शरीफ़ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल) के एक नेता अहसान इक़बाल ने जद्दाह से बीबीसी को बताया कि तीन घंटे की बातचीत के बाद इस समझौते पर दस्तख़त किए गए.
दोनों नेताओं की इस महत्वपूर्ण मुलाक़ात में किन मुद्दों पर और क्या बातचीत हुई, इस बारे में उनकी तरफ़ से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है. अहसान इक़बाल ने कहा कि दोनों नेता लोकतंत्र का एक विस्तृत चार्टर तैयार करने के लिए अपने-अपने दलों में कार्यदल गठित करने पर भी राज़ी हुए हैं. सऊदी अरब में किसी अन्य देश के विपक्षी नेताओं की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक है लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने रोक के बावजूद ऐसी बैठक होने को एक महत्वपूर्ण घटना बताया है. इस मुलाक़ात में बेनज़ीर भुट्टो ने नवाज़ शरीफ़ के पिता के निधन पर शोक व्यक्त भी किया, दूसरी तरफ़ नवाज़ शरीफ़ ने भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी की रिहाई पर उन्हें बधाई दी. |
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