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मंगलवार, 30 नवंबर, 2004 को 09:41 GMT तक के समाचार
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मुशर्रफ़ के सेनाध्यक्ष बने रहने को मंज़ूरी
मुशर्रफ़
मुशर्रफ़ की ग़ैर मौजूदगी में हुआ इस विधेयक पर हस्ताक्षर
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को सेनाध्यक्ष भी बनाए रखने वाला विवादित विधेयक अब क़ानून बन गया है.

लेकिन अजीब बात ये है कि मुशर्रफ़ की ग़ैर मौजूदगी में इस विधेयक पर हस्ताक्षर किए कार्यवाहक राष्ट्रपति और सीनेट के चेयरमैन मोहम्मद मियाँ सूमरो ने. इस विधेयक को संसद ने इस महीने के शुरू में ही पास कर दिया था.

मोहम्मद मियाँ सूमरो राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की अनुपस्थिति में देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं. मुशर्रफ़ इस समय दक्षिण अमरीका के दौरे पर हैं.

इसी सप्ताह पाकिस्तान के प्रमुख विपक्षी गठबंधन मुत्तहिदा मजलिस-ए-अमल के हज़ारों समर्थकों ने इस विधेयक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था.

उन्होंने मांग की थी कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए. पिछले साल राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने घोषणा की थी कि वे सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि वे दोनों पदों पर बने रहेंगे.

राष्ट्रपति के रूप में परवेज़ मुशर्रफ़ का कार्यकाल 2007 में ख़त्म होगा. लेकिन सेनाध्यक्ष के बारे में कोई समयसीमा नहीं बताई गई है.

विरोध

दो दिन पहले ही विपक्षी गठबंधन मुत्तहिदा मजलिस-ए-अमल ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मांग की थी कि मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद छोड़ दें.

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विपक्षी पार्टियाँ पहले से ही इसका विरोध कर रहीं हैं

गठबंधन के प्रवक्ता हाफ़िज़ हुसैन अहमद ने बताया कि विपक्ष इसे स्वीकार नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाएँगे.

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने भी इसका विरोध करने की घोषणा की है.

पार्टी के प्रवक्ता फ़रहतुल्ला बाबर ने कहा, "हम कार्यकारी राष्ट्रपति के इस क़दम की निंदा करते हैं."

वैसे इस विधेयक के आने से पहले ही प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ ने कहा था कि देश के मौजूदा हालात और प्रगति के लिए दोनों पद परवेज़ मुशर्रफ़ के पास रहना ही बेहतर है.

ग़ौरतलब है कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ अक्तूबर 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की सरकार का तख़्ता पलटने के बाद सत्ता में आए थे.

बाद में वह देश के राष्ट्रपति भी चुने गए थे. यह साल परवेज़ मुशर्रफ़ के सत्ता में आने का पाँचवाँ साल है.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा था कि देश के क़रीब 96 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि वह राष्ट्राध्यक्ष और सेनाध्यक्ष दोनों ही पदों पर भी बने रहें लेकिन विपक्षी दल इस वादे को ख़ारिज करते हैं.

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