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अमरीका का मुशर्रफ की निंदा से इनकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के सेनाध्यक्ष पद नहीं छोड़ने संबंधी फैसले की भर्त्सना करने से इनकार किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर से जब यह पूछा गया कि क्या अमरीका पाकिस्तान में लोकतंत्र लाने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी नहीं कर पा रहा है तो उन्होंने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. लेकिन इसके बाद ही पत्रकारों के इस सवाल का कि क्या वो परवेज मुशर्रफ के सेनाध्यक्ष पद नहीं छोड़ने के फैसले की भर्त्सना करते हैं, बाउचर ने कहा - 'नहीं'. मुशर्रफ के सेनाध्यक्ष पद नहीं छोड़ने का अर्थ यही लगाया जाता रहा है कि पाकिस्तान में लंबे समय तक सैनिक शासन रहेगा और वो भी मुशर्रफ की अगुआई में. मुशर्रफ ने पहले सेनाध्यक्ष पद छोड़ने की बात कही थी लेकिन इस महीने उन्होंने पद पर बने रहने की घोषणा कर दी. प्रवक्ता ने कहा कि अमरीका लगातार पाकिस्तान में लोकतंत्र लाने के प्रयासों का लगातार समर्थन करता रहा है और इस बारे में मुशर्रफ से भी बातचीत होती रही है. हालांकि अमरीकी नेतृत्व लगातार मुशर्रफ की तारीफ करता रहा है. आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में मुशर्रफ की भूमिका के लिए अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश स्वयं कई बार मुशर्रफ की प्रशंसा कर चुके हैं. बाउचर का यह बयान वैसे तो अमरीकी नीति के अनुरुप है लेकिन संभवत पहली बार अमरीका ने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान में उसे किस तरह की सरकार सही लगती है. |
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