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अब दूसरे चरण के लिए गहमागहमी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार और झारखंड में पहले चरण का चुनाव संपन्न हो जाने के बाद अब दूसरे चरण के लिए ज़ोर-शोर से चुनाव प्रचार चल रहा है. इस चरण में बिहार की 243 में से 86 सीटों पर और झारखंड की 81 में से 29 सीटों पर मतदान होना है. इस चरण के लिए मतदान 15 फ़रवरी को होना है. दिलचस्प मुक़ाबले झारखंड में दूसरे चरण में जिन 29 सीटों पर मुक़ाबला होना है वह कई तरह से महत्वपूर्ण है.
एक तो इन सीटों पर केंद्र में सत्तारुढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के घटक दलों की दरार साफ़ दिखाई देती है. यहाँ 29 सीटों में से 17 पर कांग्रेस, 10 पर झारखंड मुक्ति मोर्चा, 12 पर राष्ट्रीय जनता दल और 8 सीटों पर वामदलों के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. दूसरे इन्हीं सीटों पर राज्य में सत्तारुढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सदस्यों में से 20 चुनाव लड़ रहे हैं. इसमें राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी शामिल हैं जो खरसावा से चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा राज्य भाजपा के प्रमुख रघुवर दास का राजनीतिक भविष्य भी इसी चरण में तय होगा. बाढ़ वाले इलाक़े में
पहले चरण के बाद यादव-मुस्लिम समीकरण में दरार की ख़बरों के चलते राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने अपनी पूरी ताक़त इस क्षेत्र में झोंक रखी है. इसी चरण में सहरसा, पूर्णिया और मधेपुरा के इलाक़ों में चुनाव होना है जो पप्पू यादव के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है. चूंकि पप्पू यादव हाल ही में आरजेडी की टिकट पर मधेपुरा से लोकसभा का चुनाव जीते थे और अब वे आरजेडी से नाराज़ हो गए हैं तो यहाँ मुक़ाबले दिलचस्प हो गए हैं. इन क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों ने भी अपनी ताक़त झोंक रखी है. |
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