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शंकराचार्य को सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत दी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
काँची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को कांची मठ के कर्मचारी शंकररमण की हत्या के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ज़मानत दे दी. सोमवार को सुनाए गए फ़ैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने दो मुचलकों के आधार पर यह ज़मानत दी है. इस मुचलके की राशि मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी तय करेंगे. शंकराचार्य को अपना पासपोर्ट भी पुलिस को सौंपना होगा. हत्या के प्रयास के एक मामले में उन्हें पहले ही ज़मानत दी जा चुकी है. मुख्य न्यायाधीश आरसी लाहोटी, न्यायमूर्ति जीपी माथुर और न्यायमूर्ति पीपी नावलेकर के एक पीठ ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई के बाद अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा था. पीठ की ओर से फ़ैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति जीपी माथुर ने कहा कि जब तक इस मामले की जाँच पूरी नहीं हो जाती शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती कांची मठ नहीं जाएँगे. मठ के कर्मचारी शंकररमण की सितंबर में हुई हत्या के आरोप में 11 नवंबर को शंकराचार्य को गिरफ़्तार कर लिया गया था. शंकररमण मठ के कथित काले कारनामें के बारे में पत्र लिख रहे थे और इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी. पुलिस का आरोप है कि शंकररमण की हत्या के लिए मठ से पैसौं का भुगतान किया गया था. लेकिन अब तक पुलिस मठ के खाते से निकाले गए रुपयों और हत्या के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं कर सकी है. इस मामले में मद्रास उच्च न्यायालय ने दो बार शंकराचार्य को ज़मानत देने से इंकार कर दिया था. शंकराचार्य पर इस मामले के अलावा हत्या के प्रयास का एक और मामला चल रहा है. मठ से जुड़े एक व्यक्ति राधाकृष्णन पर जानलेवा हमले के मामले में शंकराचार्य को मद्रास उच्च न्यायालय ने पहले ही ज़मानत दे दी थी. नवंबर में शंकराचार्य की गिरफ़्तारी के बाद से उन्हें वेल्लूर की जेल में रखा गया था. स्वागत शंकराचार्य को ज़मानत मिल जाने पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा है कि इस फ़ैसले से भारतीय जनता पार्टी की बात प्रमाणित हुई है. उन्होंने कहा है कि भाजपा पहले से ही कहती रही है कि क़ानून को अपना काम करना चाहिए लेकिन शंकराचार्य जैसे व्यक्ति के साथ हत्या के सामान्य अपराधी की तरह व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए. शंकराचार्य के वकील एमएन कृष्णमणि ने इस फ़ैसले को धर्म और सत्य की जीत बताया है. |
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