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मणिपुर में 13 विद्रोही मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सेना ने कहा कि उसने पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पिछले महीने से चलाए गए अभियान में कम से कम 13 विद्रोही मार दिए हैं और 34 को गिरफ़्तार कर लिया है. भारतीय सेना के प्रवक्ता मेजर सांतनु देव गोस्वामी ने कहा कि मणिपुर के जंगलों में विद्रोहियों के बहुत से शिविर भी तबाह कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा, "अब विद्रोही अपने शिविर छोड़कर भाग रहे हैं लेकिन वे बर्मा में नहीं घुस सकते क्योंकि वहाँ से भी सीमा बंद कर दी गई है." बर्मा ने विद्रोहियों के ख़िलाफ़ ऐसे अभियानों में सहयोग का आश्वासन तब दिया था जब उसके सैनिक शासक जनरल थान श्वे ने पिछले महीने भारत का दौरा किया था. सक्रिय ग़ौरतलब है कि मणिपुर में कई विद्रोही संगठन सक्रिय हैं. उनमें से बहुत से संगठन भारत सरकार पर आरोप लगाते हैं कि राज्य खनिज समृद्ध क्षेत्र का दोहन तो किया जा रहा है लेकिन पूर्वोत्तर क्षेत्र की अनदेखी की जा रही है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कहा कि जो शिविर तबाह किए गए हैं उनमें यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और कुछ अन्य छोटे संगठनों के शिविर थे. पिछले साल भूटान ने भी इन विद्रोहियों को अपने यहाँ से निकालने के लिए अभियान चलाया था और बांग्लादेश ने भी भारत सरकार से कहा है कि वह इन विद्रोहियों को अपनी ज़मीन का प्रयोग करने की इजाज़त नहीं देगा. मणिपुर में उस केंद्रीय क़ानून के विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे जिमसें भारतीय सेना को संदिग्ध विद्रोहियों को पकड़ने और मारने के मामले में विशेषाधिकार दिए गए हैं. इस सप्ताह प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने मणिपुर के कुछ विद्रोही संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात भी की थी और कहा था कि सरकार उस क़ानून की जगह एक नया क़ानून बनाने पर विचार करेगी. |
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