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खपलांग गुट भी बातचीत के लिए तैयार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नगा विद्रोही संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड (एनएससीएन0 के ख़पलांग गुट ने भारत सरकार से कहा है कि वह बर्मा में उनके ठिकानों पर बर्मा सरकार के साथ मिलकर अभियान चलाना बंद कर दे. खपलांग गुट ने यह भी कहा है कि वह भारत सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है इसलिए सरकार को उनके ख़िलाफ़ अभियान चलाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए. बर्मी मूल के नगा नेता खपलांग ने 1988 में अपने समर्थकों के साथ एनएससीएन से अलग होकर अलग गुट बना लिया था. एनएससीएन का मुख्य गुट (मुइवा) भारत सरकार के साथ पिछले सात साल से बातचीत कर रहा है और खपलांग गुट ने भी हाल ही में बातचीत में शामिल होने की इच्छा जताई थी. खपलांग गुट के प्रवक्ता के मुलातोनू ने बीबीसी को बताया कि उनका गुट भारत सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है. मुलातोनू ने कहा कि गुट के अध्यक्ष खपलांग ने भारत के गृह मंत्रालय को इस बारे में पहले ही सूचना दे दी है कि उनका एक प्रतिनिधिमंडल नवंबर के पहले सप्ताह में बातचीत की मंशा से दिल्ली पहुँचेगा. प्रवक्ता ने कहा कि इसलिए भारत सरकार को बर्मा सीमा पर उनके ख़िलाफ़ बर्मा सरकार के साथ मिलकर सैनिक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए. संयुक्त कार्रवाई यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब बर्मा के एक वरिष्ठ सैनिक अधिकारी जनरल थान श्वे पाँच दिन की भारत यात्रा पर रविवार को दिल्ली पहुँच रहे हैं. मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि भारतीय सेना बर्मी सेना के साथ मिलकर बर्मा में मौजूद नगा विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ने पर विचार कर रही है. ऐसी भी ख़बरें हैं कि दोनों देश नगा विद्रोहियों के ख़िलाफ़ व्यापक अभियान के लिए कोई समझौता भी कर सकते हैं. खपलांग गुट के प्रवक्ता मुलातोनू ने कहा कि उनके पदाधिकारी ऐसी ख़बरों से ख़ासे परेशान हैं. उन्होंने कहा कि उनके संगठन में यह आम राय है कि अगर वे बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार हैं तो उनके ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई की योजना पर अमल नहीं किया जाना चाहिए. मुलातोनू ने कहा कि युद्ध और शांति एक ही समय में नहीं हो सकतीं. भारत-बर्मा सीमावर्ती इलाक़ों में खपलांग गुट के क़रीब बीस ठिकाने हैं और उनमें से ज़्यादातर बर्मी इलाक़े में ही हैं. बर्मा की सेना ने उन ठिकानों पर अक्सर हमले किए हैं लेकिन उनमें ज़्यादा कामयाबी नहीं मिली. भारत अब बर्मा पर कुछ बड़े अभियान चलाने के लिए ज़ोर डाल रहा है. |
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