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लाहौरः मस्जिद पर आत्मघाती हमला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के लाहौर शहर की एक शिया मस्जिद में हुए धमाके में कम-से-कम चार लोग मारे गए हैं. छह लोग घायल भी हुए हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मरने वालों में एक 13 वर्ष का लड़का और दो सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. इस घटना को पाकिस्तान में शिया-सुन्नी संघर्ष की ताज़ा कड़ी माना जा रहा है. इस महीने ही ऐसे दो हमलों में 70 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. पुलिस का कहना है कि ये एक आत्मघाती हमला था. अभी तक किसी संगठन ने इस विस्फोट की ज़िम्मेदारी नहीं ली है. साज़िश पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने हाल के दिनों में हुए हमलों को देश में शिया-सुन्नी हिंसा को भड़काने की एक साज़िश बताया है. शेख़ रशीद अहमद ने कहा,"देश में कहीं कोई शिया-सुन्नी विवाद नहीं है और दोनों समुदायों के लोग जानते हैं कि ये उन लोगों की साज़िश है जो देश में अस्थिरता फ़ैलाना चाहते हैं". पाकिस्तान में लगभग 80 प्रतिशत आबादी सुन्नी मुसलमानों की है. पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों या कार्यक्रमों के दौरान इस महीने हुआ ये तीसरा बम हमला था.
चार दिन पहले ही मुल्तान में प्रतिबंधित सुन्नी संगठन सिपह-ए-सहाबा के नेता मौलाना आज़म तारिक़ की बरसी पर हो रहे कार्यक्रम के दौरान धमाका हुआ था जिसमें कम से कम 40 लोग मारे गए थे. इससे पहले स्यालकोट की एक शिया मस्जिद में भी धमाका हुआ था जिसमें 31 लोग मारे गए थे. आत्मघाती हमला पुलिस के अनुसार रविवार शाम को हाथ में ब्रीफ़केस लिए एक व्यक्ति ने लाहौर के हुसैनिया हॉल मस्जिद में घुसने की कोशिश की. उस समय इस शिया मस्जिद में शाम की नमाज़ अदा की जा रही थी. इस व्यक्ति को दो सुरक्षा गार्डों ने रोक लिया और उसी समय ब्रीफ़केस में धमाका हो गया. ब्रीफ़केस लेकर आए व्यक्ति और दोनों सुरक्षा गार्डों की मौक़े पर ही मौत हो गई. स्थानीय पुलिस अधिकारी ज़ाहिरुद्दीन बाबर ने बताया, "जब सुरक्षा गार्ड के जवानों ने उस व्यक्ति को रोकने की कोशिश की तो उसने गोलियाँ चलानी शुरू कर दी और बाद में ख़ुद को उड़ा लिया." एक शिया नेता ख़्वाजा बशारत ने समाचार एजेंसी को बताया कि अगर आत्मघाती हमलावर मस्जिद के अंदर घुस जाता तो मरने वालों की संख्या बहुत हो सकती थी. उन्होंने कहा, "अगर सुरक्षा गार्ड के जवानों ने उस व्यक्ति को नहीं रोका होता तो वह व्यक्ति हॉल तक पहुँच जाता. जवानों ने कई लोगों की जान बचा ली." इस धमाके के बाद ग़ुस्साए लोगों ने पुलिस और पत्रकारों को लंबे समय तक अंदर घुसने नहीं दिया. |
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