|
असम में छह और लोगों की हत्या | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर भारत में पिछले शनिवार से शुरू हुई हिंसा का दौर जारी है. सोमवार को असम में अलगाववादी बोडो विद्रोहियों ने छह और लोगों की हत्या कर दी. इस तरह पिछले तीन दिनों में असम और पड़ोसी राज्य नगालैंड में मारे जानेवालों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है. हिंसा भड़कने से केंद्र सरकार भी चिंतित हो उठी और गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने रविवार को असम और नगालैंड का दौरा कर वहाँ के मुख्यमंत्रियों से मुलाक़ात की. गृहमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों में उग्रवाद की समस्या से निपटने के लिए केंद्र शीघ्र ही एक दीर्घावधि योजना तैयार करेगा जिसमें राज्यों के सुरक्षा बलों, सेना और अर्द्धसैनिक बलों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. सोमवार को हिंसा
असम पुलिस के अनुसार सोमवार तड़के संदिग्ध बोडो चरमपंथियों ने राज्य के सोनितपुर ज़िले के झिंझिया गाँव में छह ग्रामीणों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून दिया. मारे गए लोग ग़ैर बोडो समुदाय से थे. नेशनल डेमोक्रेटिक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड नामक चरमपंथती संगठन के चरमपंथियों ने इससे पहले हमले कर रविवार को 11 और शनिवार को 20 लोगों की हत्या कर दी थी. उधर राज्य में एक और प्रमुख चरमपंथी गुट युनाईटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम यानी अल्फ़ा के विद्रोहियों ने भी एक गैस पाइपलाइन को नुक़सान पहुँचाया है और सेना के एक ट्रक को बारूदी सुरंग से उड़ाने की कोशिश की. अल्फ़ा की सैनिक शाखा के प्रमुख परेश बरुआ ने बीबीसी को बताया कि उनके गुट ने असम सरकार के साथ बातचीत शुरू करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और वे केवल भारत सरकार से बात कर सकते हैं. एनडीएफ़बी असम सरकार के ऐसे ही एक प्रस्ताव को पहले ठुकरा चुकी है. आकलन ख़ुफ़िया अधिकारियों के अनुसार ऐसा लग रहा है कि अल्फ़ा और एनडीएफ़बी दिसंबर में की गई सैनिक कार्रवाई में भूटान में उनके अड्डों को हुए भारी नुक़सान के बाद एक बार फिर संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि शनिवार को नगालैंड के शहर दीमापुर में हुए दोनों विस्फोटों में भी बोडो विद्रोहियों का हाथ हो सकता है. इन विस्फोटों में 36 लोग मारे गए थे और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे. नगालैंड के अलगाववादी गुट एनएससीएन ने इन हमलों में हाथ होने से इनकार किया है. एनएससीएन का कहना है कि इनके पीछे असम के विद्रोहियों का हाथ है और उन्होंने वादा किया है कि वे इस बारे में पूरी जानकारी जुटाएँगे. संगठन के एक प्रवक्ता कराइबो चवांग ने बीबीसी को बताया है कि एनएससीएन अभी भी भारत सरकार के साथ वह शांतिवार्ता जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है जो 1997 में शुरू की गई थी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||