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रविवार, 12 सितंबर, 2004 को 12:20 GMT तक के समाचार
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संयुक्त राष्ट्र ने शांति की अपील की
हेरात
इस्माइल ख़ान समर्थकों ने संयुक्त राष्ट्र परिसर पर हमला किया
अफ़ग़ानिस्तान के हेरात प्रांत में भड़की हिंसा के बाद संयुक्त राष्ट्र और अफ़गान सरकार ने वहाँ शांति की अपील की है.

प्रमुख अफ़ग़ान नेता इस्माइल ख़ान हो हेरात के गवर्नर के पद से हटाए जाने के बाद वहाँ भड़की हिंसा में सात लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

उनके समर्थकों ने वहाँ के संयुक्त राष्ट्र की मुख्य परिसर पर हमला किया, कारों को आग लगा दी और परिसर के कुछ हिस्से में भी आग लगा दी.

इस बीच हेरात के नवनियुक्त गवर्नर मोहम्मद ख़ैर-ख्व़ा वहाँ पहुँच गए हैं. वहाँ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वह स्थानीय प्रतिष्ठित लोगों से मुलाक़ात करेंगे.

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इस्माइल ख़ान इलाक़े के प्रभावशाली नेता हैं

इस्माइल ख़ान को हटाए जाने के विरोध में रविवार सुबह से ही संघर्ष शुरू हो गया था. समय बीतने के साथ प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी भीड़ ने परिसर को घेर लिया.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाड़ियाँ जलाई गईं और हेरात में मौजूद अमरीका के एक अधिकारी का कहना है कि अफ़ग़ान और अमरीकी सैनिकों ने अंदर से कर्मचारियों को बचा लिया.

अमरीकी हेलिकॉप्टर घटनास्थल पर ऊपर चक्कर लगा रहे हैं. शहर भर में गोलियाँ चलने की आवाज़ें सुनी जा सकती हैं.

इससे पहले इस्माइल ख़ान ने राष्ट्रपति हामिद करज़ई का वो प्रस्ताव ठुकरा दिया था जिसके तहत उन्हें हेरात के गवर्नर की जगह देश का खदान और उद्योग मंत्रालय सँभालने के लिए कहा था.

प्रभावशाली नेता

तालेबान शासन के गिरने के बाद से ही इस्माइल ख़ान अफ़ग़ानिस्तान के एक प्रमुख नेता रहे हैं.

वह एक सशक्त सैनिक कमांडर हैं और राजस्व के लिए उन्होंने लाखों डॉलर भी जुटाए हैं. माना जाता है कि पूरे अफ़ग़ानिस्तान में प्रभुत्व बनाने की कोशिश कर रही केंद्र सरकार के लिए ये शासन एक चुनौती की तरह था.

हेरात में अफ़ग़ानिस्तान के दूसरे शहरों की तरह न होकर एक साफ़-सुथरा सा शहर है जहाँ की सड़कें साफ़ रहती हैं और लोग सामान्य तौर पर यातायात के नियमों का पालन करते हैं.

हेरात की महिलाएँ देश की सर्वाधिक पढ़ी-लिखी महिलाओं में से एक होती हैं और लोग शाम को पेड़-पौधों वाले बग़ीचों में घूमने भी जाते हैं.

यूँ तो इस्माइल ख़ान के शासन के दौरान हेरात काफ़ी संपन्न हुआ मगर ये भी कहा जाता है कि इसकी क़ीमत उसे मानवाधिकारों के रूप में चुकानी पड़ी.

पूर्व गवर्नर की अपनी एक अलग सेना थी जो सड़कों पर नियंत्रण के लिए निकलती थी. हेरात की महिलाएँ पढ़ी-लिखी तो थीं मगर फिर भी उन्हें रूढ़िवादी तरीक़ों से ही रहना होता था.

तालेबान शासन की समाप्ति के बाद से ही कहा जाता रहा है कि केन्द्र सरकार का पश्चिमी हिस्सों में नियंत्रण कम ही रहा है और इसकी एक प्रमुख वजह इस्माइल ख़ान का व्यक्तिगत प्रभुत्व रहा है.

अफ़ग़ान नेता के तौर पर हामिद करज़ई अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी कर रहे हैं इसलिए हेरात में हो रही घटनाओं पर कड़ाई और नज़दीक़ी से नज़र रखी जाएगी.

मगर अब प्रमुखता से जो सवाल उभर रहा है वो ये है कि तालेबान शासन की समाप्ति के तीन साल बाद क्या आख़िरकार केंद्र सरकार अफ़ग़ानिस्तान के हर महत्त्वपूर्ण नगर पर अपना नियंत्रण बना पाएगी.

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