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'नज़रअंदाज़ हो रही है राष्ट्रीय सुरक्षा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी ने सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया है. पूर्व उप प्रधानमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भाजपा मुख्यमंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये आरोप लगाया. आडवाणी का कहना था कि सत्ताधारी गठबंधन राष्ट्रीय सुरक्षा को भी संकीर्ण राजनीतिक और चुनावी संदर्भ में देखता है. उनका कहना था कि नेपाल की माओवादी समस्या भारत के कम से कम दो राज्यों के लिए चिंता का विषय है लेकिन भारत सरकार ने आंध्र प्रदेश में प्रतिबंधित संगठन पीपुल्स वॉर ग्रुप से प्रतिबंध हटाया है और आतंकवाद निरोधक क़ानून पोटा को भी हटाने की बात कर रही है.
मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की तिरंगा यात्रा को हरि झंडी दिखाने वाले आडवाणी की भाजपा मुख्यमंत्रियों को हिदायत थी कि पार्टी की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नीति उसकी शक्ति है. उनका कहना था कि इस नीति के लिए पार्टी को शर्मिंदगी महसूस करने की ज़रूरत नहीं है. उधर पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू का आरोप था कि यूपीए सरकार भाजपा के प्रति टकराव का रवैया रखती है भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सुशासन पर ज़ोर देना चाहिए. उनका कहना था कि राष्ट्रवाद और विकास दोनो को ही प्राथमिकताएँ बनाना ज़रूरी है. मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में सुरक्षा की चुनौतियों, राज्यों की वित्तीय हालत, सामाजक और आर्थिक विकास पर चर्चा होगी. जनसंख्या नियंत्रण और सर्व शिक्षा अभियान पर भी चर्चा होगी. भाजपा अध्यक्ष का भाषण यूपीए सरकार के साझा न्यूनतम कार्यक्रम जैसा नज़र आया. ये कहना अनुचित नहीं होगा कि लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी को आम आदमी की याद फिर से आ रही है और अब उसका ध्यान विकास के साथ-साथ सुशासन पर भी है. |
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