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चुनाव आयोग ने दी चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को चेतावनी दी है कि वे धार्मिक पर्वों का राजनीतिक मकसदों के लिए इस्तेमाल न करें. मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णामूर्ति का कहना था, "ये सभी राजनीतिक दलों पर लागू होता है. यदि राजनीतिक दल धार्मिक उत्सवों का राजनीतिक इस्तेमाल करते हैं तो भारतीय दंड संहिता के तहत उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के पर्याप्त प्रावधान हैं." मुख्य चुनाव आयुक्त ने महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में चुनावों से पहले पर्यवेक्षकों की एक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऐसा कहा. महाराष्ट्र विधानसभा के लिए 13 अक्तूबर और अरूणाचल प्रदेश विधानसभा के लिए सात अक्तूबर को मतदान होना है. जब उनसे भाजपा की तिरंगा यात्रा के महाराष्ट्र में दाख़िल होने के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि यदि ज़रूरत पड़े तो राज्य सरकार के पास कार्रवाई करने के पर्याप्त अधिकार हैं. महाराष्ट्र में गणेशचतुर्थी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और राजनीतिक दलों के सदस्य भी इसमें हिस्सा लेते हैं. दूसरी ओर भाजपा नेता उमा भारती की तिरंगा यात्रा तो इस समय चल ही रही है. चुनाव आयुक्त एन गोपालास्वामी ने पर्यवेक्षकों के बारे कहा, "कुछ भी बुरा न करें. किसी के पैसे से आयोजित मेहमाननवाज़ी स्वीकार कर ख़ुद को शर्मिंदा न करें. पर्यवेक्षकों को अपना काम गंभीरता से लेना चाहिए, अवकाश के तौर पर नहीं." उन्होंने पर्यवेक्षकों को संबोधित करते हुए कहा,"आपकी उपस्थिति का सभी को एहसास होना चाहिए - राजनीतिक दलों को, उम्मीदवारों को और चुनाव कर्मचारियों को." |
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