|
सीपीआई: राष्ट्रीय दल की मान्यता ख़तरे में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चुनाव आयोग ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को उसकी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता ख़त्म करने के लिए एक नोटिस भेजा है. आयोग ने इसी तरह का नोटिस राज्य स्तर की नौ राजनीतिक पार्टियों को भेजा है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) से आयोग ने पूछा है कि पिछले लोकसभा चुनावों के नतीजों के आधार पर राष्ट्रीय दल के रुप में उसकी मान्यता क्यों न वापस ले ली जाए. जवाब देने के लिए सीपीआई को 31 अगस्त तक का समय दिया गया है. चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आबंटन) आदेश, 1968 के तहत किसी भी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने के लिए उसके पास या तो राज्य में लोकसभा की कुल सीटों में से दो प्रतिशत सीटें होनी चाहिए या फिर तीन राज्य मिलाकर 11 सीटें होनी चाहिए या फिर चार राज्यों में उनके पास छह प्रतिशत मत उन्हें मिले हों और उनके चार सांसद हों. सीपीआई के पास अभी लोकसभा में सिर्फ़ 10 सांसद हैं. राज्य स्तर की जिन पार्टियों को आयोग ने नोटिस दिया है उनमें हैं पंजाब से शिरोमणि अकाली दल (मान), तमिलनाडु में वाइको के नेतृत्व वाली एमडीएमके, पांडिचेरी में पीएमके, त्रिपुरा में पीएमके, त्रिपुरा में तृणमूल कांग्रेस, असम में सीपीआई (एमएल लिबरेशन), केरल कांग्रेस और मेघालय डेमोक्रेटिक पार्टी. इन दलों को तीन सितंबर तक अपना जवाब चुनाव आयोग को देना है. पीएमके को पांडिचेरी और तमिलनाडु में तथा तृणमूल कांग्रेस को पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में मान्यता है. जिन दलों की मान्यता राज्य के स्तर पर रद्द हो जाएगी वे एक राजनीतिक दल के रुप में पंजीकृत बनी रहेंगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||