| गुरू ग्रंथ साहब के 400 वर्ष पर विशेष | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिखों के पावन ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहब के संपादन और उसकी अमृतसर में स्थित हरिमंदिर साहब में स्थापना को एक सितंबर को 400 साल हो गए. इस अवसर पर प्रकाश दिवस मनाया जा रहा है. सिखों के पांचवें गुरू अर्जुन देव ने भाई गुरुदास से इसका संपादन करवाया था और इसे 1604 में हरिमंदिर साहब में स्थापित किया गया. इस अवसर पर भारत और विदेशों से लाखों श्रद्धालु अमृतसर मे एकत्र हुए. बीबीसी हिंदी की ओर से इस अवसर पर एक विशेष प्रस्तुति में पढ़िए गुरु ग्रंथ साहब से संबंधित जानकारी, ख़बरें और विश्लेषण. देखिए अमृतसर से प्राप्त कुछ रोचक तस्वीरें: गुरु ग्रंथ साहिब और आदर्श समाज का सिद्धांत
गुरु ग्रंथ साहब में आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ एक आदर्श समाज की स्थापना का संदेश है. इस ग्रंथ में सिख गुरुओं के साथ-साथ हिंदू भक्तों और सूफ़ी संतों की रचनाएँ भी हैं. पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार जगतार सिंह का लेख: अमृतसर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा
सिखों के धार्मिक ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहब के प्रकाश उत्सव के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने पंजाब के अमृतसर शहर में एकत्र होना शुरु कर दिया है. देश विदेश से लाखों लोग पाठ करने के लिए अमृतसर पहुँच रहे हैं. पूरा राजनैतिक परिदृश्य ही बदला हुआ है
ख़ालसा पंथ के तीन सौ साल पूरे होने के समय पैदा हुए विवादों की गुरु ग्रंथ साहब के प्रकाश दिवस के समय कोई चर्चा नहीं. विश्लेषक डॉक्टर प्रमोद कुमार का कहना है कि पूरा राजनैतिक परिदृश्य ही बदला हुआ लगता है. 'भारत के आध्यात्मिक ज्ञान का सार'
गुरु ग्रंथ साहब की हरिमंदिर साहब में स्थापना के 400 साल पूरे होने पर राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल वहाँ पहुँचे. उन्होंने इसे भारत के आध्यात्मिक ज्ञान का सार कहा. ख़ालसा त्रिशताब्दी पर किए वादे अब भी अधूरे
वर्ष 1999 में ख़ालसा त्रिशताब्दी के मौके पर किए वादे अब भी अधूरे हैं. लेकिन क्या गुरु ग्रंथ साहब की स्थापना की जयंती पर सिख नेतृत्व आम सिख को कोई दिशा या संदेश दे पाएगा? |
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