BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
रविवार, 15 अगस्त, 2004 को 03:50 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
फंदे की रस्सी के लिए उमड़े लोग

धनंजय चटर्जी का शव
धनंजय को शनिवार, 14 अगस्त को फाँसी दी गई
कोलकाता के हेतल पारेख बलात्कार और हत्याकांड के अभियुक्त धनंजय चटर्जी को शनिवार को फाँसी तो दे दी गई लेकिन फाँसी के फंदे के लिए जल्लाद नाटा मलिक के घर के लोगों की भीड़ उमड़ रही है.

सुनने में यह कुछ अटपटा लगता हो लेकिन बिल्कुल सच.

धनंजय चटर्जी को अलीपुर जेल में जिस रस्सी से फाँसी के तख़्ते पर लटाकाया गया, उसका एक छोटा सा टुकड़ा पाने के लिए जल्लाद नाटा मल्लिक के घर लोगों का ताँता लग गया है.

इसकी वजह लोगों का यह विश्वास या अंधविश्वास है कि फाँसी के फंदे की रस्सी से दमा जैसी असाध्य बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं.

जल्लाद नाटा मलिक उस रस्सी के टुकड़े ताबीज़ में भर कर बेचते हैं और ख़रीददारों में सिर्फ़ ग़रीब और अनपढ़ ही नहीं बल्कि पढ़े-लिखे और पैसे वाले लोग भी हैं.

नाटा मल्लिक ने पहले भी फाँसी के फंदे वाले ताबीज़ बेच कर हजारों रुपए कमाए हैं.

औषधीय गुण

नाटा मलिक का कहना है कि इस रस्सी में औषधीय गुण होते हैं और उसका दावा है कि ताबीज़ पहनने से कई लोगों को असाध्य बीमारियों से छुटकारा मिल गया है.

जल्लाद नाटा मलिक
क्या वाक़ई फंदे में औषधीय गुण होते हैं?

इससे पहले 1991 में कार्तिक शील और सुकुमार बर्मन नामक दो अभियुक्तों को फाँसी पर चढ़ाने के कारण उन्हें एक साथ दो फंदे मिले थे.

उन रस्सियों के छोटे टुकड़े ही उनके पास बचे थे. लेकिन धनंजय की सज़ा ने उनका स्टॉक बढ़ा दिया है.

वह कहते हैं कि बीते दो दशकों में उसके पास इतने मरीज़ आए हैं कि वह गिनती ही भूल गया है. लेकिन ताबीज़ पहनने के बाद वे सब स्वस्थ हो गए.

नाटा बताते हैं कि फाँसी के पहले इन रस्सियों पर साबुन, केला और घी लगाने के कारण इनमें औषधीय गुण आ जाते हैं.

यह काम करने वाले वह पहले जल्लाद नहीं हैं. उनके दादा भी ताबीज़ बना कर बेचते थे.

नाटा कहते हैं कि उनकी कोई पक्की नौकरी या पेंशन तो है नहीं इसलिए इस काम से एक तो लोगों का भला होता है और दूसरे, ठीक-ठाक आमदनी भी हो जाती है.

शनिवार, 14 अगस्त 2004 को उन्होंने अपने जीवन की पच्चीसवीं और आख़िरी फाँसी दी.

जेल से बाहर निकलने पर नाटा ने पत्रकारों को बताया कि यह पहला ऐसा मुजरिम था, जो फाँसी के फंदे पर झूलने से पहले की प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह शांत रहा.

उसने बस यही कहा कि भगवान सबका भला करें. यह कहते हुए जल्लाद नाटा मलिक भी अपनी आँखें पोंछने लगते हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>