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शुक्रवार, 13 अगस्त, 2004 को 16:07 GMT तक के समाचार
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धनंजय चटर्जी को फाँसी दी गई
धनंजय के रिश्तेदार
धनंजय के रिश्तेदार फाँसी का विरोध कर रहे थे
कोलकाता में एक स्कूली छात्रा के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मुजरिम धनंजय चटर्जी को शनिवार तड़के साढ़े चार बजे फाँसी पर लटका दिया गया है.

14 वर्ष तक चले मुक़दमे और विभिन्न अपीलों और याचिकाओं को ठुकराए जाने के बाद धनंजय को शनिवार को कोलकाता की अलीपुर जेल में फाँसी दे दी गई.

भारत में क़रीब एक दशक के बाद किसी को फाँसी दी गई है.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने फाँसी के विरोध में कोलकाता में मोमबत्ती जलाकर प्रदर्शन किया.

धनंजय को अलीपुर जेल में फाँसी के फंदे पर क़रीब आधे घंटे तक लटकाए रखा गया जिसके बाद उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया.

धनंजय के परिजनों ने फाँसी का विरोध किया और इसी विरोध के तहत उन्होंने धनंजय का शव लेने से इनकार कर दिया.

धनंजय की सज़ा माफ़ करने के लिए दायर की गई एक जनहित याचिका कोलकाता के उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ख़ारिज कर दी थी.

ये याचिका एक मानवाधिकार संगठन ने दायर की थी जिसका कहना था कि अब सभ्य समाजों से सज़ा-ए-मौत ख़त्म हो गई है और भारत को भी इसे ख़त्म कर देना चाहिए.

इससे पहले भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पाँच सदस्यों की खंडपीठ ने भी उनके भाई की ओर से दायर याचिका ख़ारिज कर दी थी. इसके अलावा न्यायालय ने उनकी फाँसी की तारीख़ भी तय कर दी थी.

कोलकाता उच्च न्यायालय ने कहा कि धनंजय को जो सज़ा सुनाई गई थी उसमें जनहित का कोई मामला नहीं था इसलिए उन्होंने याचिका को सुनवाई के लायक भी नहीं समझा.

कई प्रमुख लोगों ने भी उस मानवाधिकार संगठन के मत का समर्थन किया है जिसने जनहित याचिका दायर की थी. इनमें प्रमुख फ़िल्मकार अपर्णा सेन, बंगाली लेखक सुनील गांगुली और लेखिका महाश्वेता देवी शामिल थीं.

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नौ साल बाद भारत में किसी को फाँसी दी गई

मगर कोलकाता के अधिकतर लोग इस सज़ा का समर्थन कर रहे थे.

सर्वोच्च न्यायालय ने धनंजय को फाँसी की सज़ा सुनाई थी जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सामने माफ़ी की अपील की थी.

लेकिन राष्ट्रपति ने भी क्षमादान से इनकार कर दिया.

धनंजय के परिजनों का कहना था कि वे न तो फाँसी के समय मौजूद रहेंगे और न ही शव लेने जाएँगे. बल्कि वे लोग तो ख़ुद ही आत्महत्या करने की धमकी दे चुके थे.

जल्लाद नाटा मलिक ने धनंजय को फाँसी देने का काम अंजाम दिया.

चटर्जी के परिजनों ने राष्ट्रपति की ओर से आई उस चिट्ठी को भी लेने से इनकार कर दिया जिसमें उनकी दया याचिका ख़ारिज करने की बात कही गई थी. तब वो सूचना उनके घर पर चिपका दी गई थी.

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